अम्बेडकरनगर: जलालपुर नगर में सैकड़ों वर्षों से चली आ रही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा ग़उवा चरावन का आयोजन इस वर्ष भी बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया।
यह परंपरा प्राचीन काल से ही श्रीकृष्ण और बलराम की ग्वालबाल लीलाओं से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण बाल्यावस्था में अपने सखा बलराम और ग्वाल दोस्तों के साथ गाय-बछड़ों को चराने जाते थे, तब गांव-गांव के लोग उनके पीछे-पीछे चलते और इस दृश्य को देखने के लिए उमड़ पड़ते थे।
इस वर्ष की शोभायात्रा का शुभारंभ बाबा पलटू साहब मंदिर से हुआ। रथ पर भगवान श्रीकृष्ण और बलराम तथा मंदिर के महंत राम प्रसाद दास सवार थे। शोभायात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होती हुई सराय चौक होते हुए रामलीला मैदान पहुंची। वहां परंपरा के अनुसार भगवान कृष्ण और बलराम ने गाय के बछड़े को चराकर ग़उवा चरावन की रस्म पूरी की। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामलीला मैदान में लगे मेले में नगर व आसपास के गांवों से आए परिवारों ने चाट, चाउमीन, बर्गर सहित विभिन्न व्यंजनों का स्वाद चखा। बच्चों ने रंग-बिरंगे झूलों, खिलौनों और गुब्बारों का जमकर आनंद लिया।
कार्यक्रम की अगुवाई रामलीला समिति अध्यक्ष सुरेंद्र सोनी, नगर अध्यक्ष संदीप अग्रहरि, पूर्व नगर अध्यक्ष मानिकचंद सोनी, बेचन पांडे, आनंद मिश्रा सहित अन्य लोगों ने किया।




