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बेसहारा मरीजों के लिए एक उम्मीद बने ज़ाकिर हुसैन

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विश्व रक्तदान दिवस पर विशेष – ज़ाकिर हुसैन की सेवाओं को सलाम

आजमगढ़: दुर्भाग्यपूर्ण या जागरूकता की कमी कहें कि हमारे देश में समय पर खून ना मिलने की कमी के कारण हर साल हजारों लोग मर जाते हैं। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में जन्मे जाकिर हुसैन देश में खून की कमी की इस गंभीर समस्या को न सिर्फ समझते हैं बल्कि इससे निपटने के लिए जमीनी स्तर पर भी काम कर रहे हैं।उन्होंने अब तक 700 से अधिक मरीजों को मुफ्त रक्त उपलब्ध कराया है। पेशे से पत्रकार जाकिर हुसैन पिछले पांच साल से रक्तदान पर जागरूकता अभियान चला रहे हैं और उनके संगठन अल फलाह फाउंडेशन के मंच से 700 से अधिक लोगों तक हजारों यूनिट रक्त मुफ्त में पहुंचाया जा चुका है۔

जाकिर कहते हैं, “मेरे एक परिचित की पत्नी को ‘ओ’ निगेटिव खून की जरूरत थी, हम सभी ने बहुत कोशिश की, लेकिन खून का इंतजाम नहीं हो सका, अंत में खून की कमी के कारण उसकी सांसें थम गई। इस घटना ने मुझे अंदर से झकझोर कर रख दिया और मैंने तय किया कि अब न केवल मैं खुद जरूरतमंदों को रक्तदान करूंगा, बल्कि दूसरों को भी इसका रास्ता दिखाऊंगा।जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली के छात्र जाकिर हुसैन ने दिल्ली में रहते हुए 28 सितंबर 2019 को अल फलाह फाउंडेशन (ब्लड डोनेट ग्रुप) की शुरुआत की थी।वे अपने अभियान से और लोगों को जोड़ना चाहते हैं, ताकि देश में खून की कमी खत्म हो और खून की कमी के कारण किसी को भी अपनी जान न गंवानी पड़े।आज जाकिर हुसैन और अल फलाह फाउंडेशन के प्रयासों से आजमगढ़ और आसपास के जिलों में रक्त प्राप्त करना बहुत आसान हो गया है और लोग रक्तदान करने के लिए तेजी से जागरुक हो रहे हैं। जाकिर हुसैन की सेवाओं को स्वीकार करते हुए कई संगठनों ने उन्हें अवार्ड्स से भी सम्मानित किया है।

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