अम्बेडकरनगर: जलालपुर में जमालपुर चौराहे से अकबरपुर रोड स्थित वाजिदपुर मोड़ तक सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण की महत्वाकांक्षी योजना अब “नोटिसबाज़ी” के जाल में उलझकर दम तोड़ती नजर आ रही है। प्रशासन के दबाव में जहां सैकड़ों लोगों ने अपने मकानों के हिस्से रातोंरात गिरा दिए, वहीं आधा दर्जन रसूखदारों के निर्माण आज भी सीना ताने खड़े हैं—और यहीं से शुरू होता है “नोटिस का खेल”।
सूत्रों के मुताबिक लोक निर्माण विभाग (PWD) के अवर अभियंता अमितेश कुमार की कथित उदासीनता के चलते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी है। नतीजा—सड़क अधूरी, सौंदर्यीकरण ठप और जनता जाम की मार झेलने को मजबूर।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उपजिलाधिकारी राहुल कुमार गुप्ता द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद विभाग सिर्फ “नोटिस चस्पा करने” तक ही सीमित है। जमीन पर कार्रवाई नदारद है, जबकि आम जनता पहले ही अपनी जेब और घर दोनों से कीमत चुका चुकी है।
जानिए क्या थी योजना?
सड़क चौड़ीकरण व बीच में डिवाइडर निर्माण एवं 11000 वोल्ट बिजली लाइन को अंडरग्राउंड करना लेकिन विभागीय ढिलाई ने इस पूरे प्रोजेक्ट को फाइलों में कैद कर दिया है।
अवर अभियंता का कहना है कि “15 दिन का नोटिस दिया जाएगा, फिर कार्रवाई होगी।” सवाल ये है कि जब महीनों से नोटिस ही खेला जा रहा है, तो असली कार्रवाई कब होगी?
जब आम लोग अपने घर तोड़ सकते हैं, तो कुछ खास लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
बहरहाल जलालपुर में विकास की गाड़ी “नोटिस” के गड्ढे में फंसी है। जब तक जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटेगी, तब तक सड़क भी अधूरी रहेगी और सिस्टम पर सवाल भी बना रहेगा।








