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पौराणिक तमसा नदी को अतिक्रमण मुक्त करने की कवायद तेज, स्थाई निर्माण करने वालों में हड़कम्प

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अम्बेडकरनगर: जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की पहल पर एक बार फिर पौराणिक तमसा नदी को अतिक्रमण मुक्त करने की कवायद तेज हो गई है। राजस्व विभाग की अलग-अलग टीमों द्वारा नदी के बीच धारा से दोनों ओर 100-100 मीटर तक की पैमाइश कर चिन्हांकन का कार्य शुरू कर दिया गया है। पैमाइश की खबर फैलते ही नदी किनारे स्थायी और पक्के निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया है।


उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में एनजीटी और शासन के निर्देश पर तमसा नदी को अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए इसी तरह का अभियान चलाया गया था। उस समय भी नदी के दोनों ओर 100-100 मीटर तक चिन्हांकन किया गया था, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने बिना किसी वैध नक्शा व अनुमति के अस्थायी और स्थायी निर्माण कार्य जारी रखा। समय-समय पर शिकायतें भी हुईं, मगर ठोस कार्रवाई के अभाव में नदी के किनारे अवैध निर्माण बढ़ते गए। इसका असर यह हुआ कि तमसा नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया और उसका जलस्तर घटते-घटते लगभग समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया। तमसा नदी के संरक्षण को लेकर तमसा श्रेष्ठ ट्रस्ट के अध्यक्ष केशव लाल श्रीवास्तव लगातार सक्रिय हैं। वे वर्षों से नदी के अस्तित्व को बचाने हेतु आंदोलनरत हैं और प्रशासन से निरंतर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस संबंध में जलालपुर उप जिलाधिकारी राहुल कुमार गुप्ता ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर तमसा नदी को अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए राजस्व विभाग द्वारा पैमाइश कर चिन्हांकन किया जाएगा। चिन्हांकन के बाद अतिक्रमण की श्रेणी में आने वाले सभी स्थायी और पक्के निर्माणों की गणना कर रिपोर्ट प्रेषित किया जाएगा। रिपोर्ट प्रेषित होने के बाद शासन या जिलाधिकारी के दिशा निर्देश के बाद आगे की कार्यवाही की जायेगी।

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