हमें भी जीने का हक़ है…।
अम्बेडकरनगर: कड़ाके की ठंड, सुनसान सड़क और जलता हुआ एक अलाव… उसी आग के सहारे ज़िंदगी बचाने की कोशिश करते कुछ बेजुबान बंदर।
टाण्डा चौक स्थित घण्टाघर के पास बनी पुलिस चौकी के सामने का यह दृश्य अब सिर्फ तस्वीर नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे सच्ची मिसाल बन गया है।
टाण्डा नगर पालिका प्रशासन द्वारा जलवाए गए सार्वजनिक अलाव के चारों ओर एक-दूसरे से सटकर बैठे बंदरों की यह तस्वीर दिल को भीतर तक झकझोर देती है। ठंड से बचने के लिए मां की गोद की तरह आग के पास सिमटे ये बेजुबान मानो खामोशी से कह रहे हों— हमें भी जीने का हक़ है…।
इस मार्मिक पल को सुरक्षा ड्यूटी में तैनात सतीश श्रीवास्तव ने अपने कैमरे में कैद कर साझा किया, जिसके बाद यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। तस्वीर देखकर लोग भावुक हो उठे और कई की आंखें नम हो गईं।
सुरक्षा ड्यूटी पर लगे सतीश श्रीवास्तव अपने फेसबुक वॉल पर दिन को टच करने वाली मार्मिक तश्वीर साझा करते हुए लिखते हैं कि ‘मेरे रात के दोस्त’।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका के ये सार्वजनिक अलाव सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भटकने वाले बेजुबानों के लिए भी जीवन रेखा हैं। यह तस्वीर हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि थोड़ी सी संवेदनशीलता, किसी की पूरी रात बचा सकती है।
टाण्डा घण्टाघर पर जलता यह अलाव ‘सिर्फ ठंड नहीं मिटा रहा था, बल्कि इंसानियत को ज़िंदा रखे हुए था।’




