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मासूम बच्चों की परवरिश में परिवार का होता है अहम किरदार, तीसरी वार्षिक नशिस्त सम्पन्न

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अम्बेडकरनगर: हर बच्चे में बचपन में परिजनों द्वारा डाले गए अच्छे संस्कार और अनुशासन, बच्चों के भविष्य का मजबूत आधार बनता है। घर वह पहली क्लास है, जहां बच्चे जीवन के जरूरी मूल्य सीखते हैं। अगर उन्हें बचपन से ही कुछ जरूरी घरेलू नियमों का पालन सिखाया जाए तो वे न सिर्फ जिम्मेदार बनते हैं बल्कि जीवनभर सही दिशा में आगे बढ़ते हैं।


उक्त बातें टाण्डा नगर के अलीगंज उत्तरी मुख्तार नगर (हजियापुर) में नबी अहमद के आवास पर रविवार को आयोजित तीसरी वार्षिक नशिस्त में दावते इस्लामी के जिला निगरान मौलाना अहमद शकील मदनी अत्तारी ने कहा। उन्होंने कहा कि बच्चों के बड़े होने का इंतज़ार ना करें बल्कि मासूम बच्चों को शुरू से ही अच्छी बातों को सिखाएं, हंसी मजाक में बच्चे वही सीख लेते हैं जो हम नहीं चाहते हैं। मां बाप व परिवार ही बच्चों का भविष्य तय करता है इसलिए मासूम बच्चों को हंसी का खिलौना न बनाएं।
नबी अहमद के आवास पर रविवार देर रात्रि में अयोजित हुई तीसरी वार्षिक नशिस्त में प्रसिद्ध शायर हेलाल टाण्डवी, अव्वल टाण्डवी, बदरे आलम, कमरुज्जम, अर्शी टाण्डवी, आफताब आतिफ आदि ने अपनी शायरी पेश कर खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम का कुशल संचालन अहमद रज़ा द्वारा किया गया। उक्त मौके पर स्थानीय लोग मौजूद रहे।

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