अम्बेडकरनगर: इंसानियत, बलिदान और भाईचारे का संदेश देते हुए मोहर्रम माह में ताजिया जुलूस निकाला जाता है। बलिदान और त्याग के प्रतीक के रूप में मनाये जाने वाले माह मोहर्रम में अज़ा खानों से शोक की आवाज़ें तेज़ हो चुकी है। जैसा कि आप जानते हैं कि पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्ल. के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कर्बला में दी गई शहादत को मोहर्रम माह में याद किया जाता है। शिया समुदाय जहां मातम सीनाजनी, मजलिसों के माध्यम से कर्बला के शहीदों को पुरसा देते हैं वहीं दूसरी तरफ सुन्नी समुदाय भी मोहर्राम्मा माह में लंगर व रोज़ा रखते हैं।
टांडा नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से शिया बाहुल्य क्षेत्रों ने मजलिसों व मातम का दौर जारी है। टांडा नगर के राजा साहब की कोठी में स्थित अज़ा खाना में मजलिस मातम व नौहाख्वानी का दौर जारी है।
सत्य व धर्म की रक्षा हेतु अंतिम सांस तक संघर्ष करने वाले इमाम हुसैन का स्पष्ट संदेश है कि अपमान भरे जीवन से सम्मानजनक मृत्यु श्रेयस्कर है। यह बात अकबरपुर विकास खंड क्षेत्र के सिकंदरपुर इमामबाड़े में मसरूर आलम की ओर से आयोजित नियमित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना जफर मारुफी ने अजादारों को संबोधित करते हुए कहा। चकबुलाकी में कमर आगा के इमामबाड़े में में भी अशरए मुहर्रम की मजलिसें जारी हैं। जिसमें मौलाना सुहैल हल्लौरी ने कहा
इमाम हुसैन इब्न अली ने यजीद की जालिम हुकूमत के खिलाफ खड़े होकर इस्लामी उसूलों और इंसाफ की हिफाजत के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उधर आफाक जैदी के अजाखाने में डा. अली मेहदी जैदी ‘ऐलिया’ द्वारा प्रतिदिन संबोधन हो रहा है। जिला मुख्यालय के मोहल्ला अब्दुल्लाहपुर हुसैनिया इमामबारगाह एवं कटरिया हाउस में सैयद मुहम्मद हसन जैदी सहित अन्य स्थानों पर प्रतिदिन 10 मजलिसों का क्रम चल रहा है। अजाखाना बैतुल अजा मीरानपुर में मौलाना इंतजार मेहदी फैजी तथा अजाखाना हाजी सज्जाद हुसैन रिजवी में हसन अब्बास रिजवी मर्सिया की मजलिस पढ़ रहे हैं।
अब्दुल्लाहपुर पंचायती इमामबाड़े से तीसरी मुहर्रम का परंपरागत मातमी जुलूस रविवार को शाम सात बजे निकलकर लोहिया मूर्ति चौक शहजादपुर तक जाकर इमामबाड़े में वापस होगा। अधिवक्ता साबिर अली ने बताया उक्त जुलूस में अंजुमन हैदरिया कदीम व अंजुमन हैदरिया पंजीकृत के अतिरिक्त गैर जनपद की अंजुमन भी शामिल होगी। तीसरी मुहर्रम का अलम जुलूस अयोध्या मार्ग स्थित हुसैनी मार्केट के निकट से रविवार की रात्रि 10 बजे अलम मुबारक के संग चौक शहजादपुर तक जाकर वहां से ताजिया के साथ पुनः उसी स्थान पर वापस होगा। अंजुमन अकबरिया के पूर्व सचिव असरार हुसैन ने बताया कि यह कदीमी जुलूस स्वर्गीय गंगा सिंह के नाम से जाना जाता है, जिसे उन्होंने लगभग दो सौ वर्ष पहले मनौती के रूप में शुरू किया था। अब यह जिम्मेदारी अंजुमन अकबरिया मीरानपुर निभा रही है।




