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महिलाओं व शिशुओं के इलाज में नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है एमसीएच टाण्डा

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माँ और बच्चे के लिए यह एक वरदान साबित हो रहा है एमसीएच विंग-2 टाण्डा

नार्मल डिलीवरी व ऑपरेशन की व्यवस्था से मरीज़ व परिजन हो रहे हैं काफी संतुष्ट

250 से 300 मरीजों की प्रतिदिन हो रही है ओपीडी व प्रतिदिन हो रही है नार्मल डिलीवरी

अम्बेडकरनगर (विशेष रिपोर्ट: आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त पत्रकार) धन अभाव में एक तरफ जहां गरीब परिवार झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में फंस कर जच्चा बच्चा के जीवन से खेल रहे हैं वहीं दूसरी तरफ टाण्डा में संचालित एमसीएच विंग-02 नित नया कीर्तिमान स्थापित कर प्रतिदिन नार्मल डिलीवरी व ऑपरेशन के माध्यम से बड़ी संख्या में मरीज को लाभ मिल रहा है।

प्रसूता व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रंजीत वर्मा

विकास खंड टाण्डा के ग्राम आसोपुर में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य के केंद्र पीछे स्थित विशाल बिल्डिंग में संचालित 200 बेड के एमसीएच विंग-02 में 50 बेड पर महिला व शिशु की स्वास्थ्य सेवा शुरू की गई है और देखते ही देखते एमसीएच पर महिलाओं की बड़ी भीड़ उमड़ने लगी।

एमसीएच विंग-02 के सीएमएस डॉक्टर अरविंद कुमार रॉय ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 250 से 300 मरीज़ आते हैं। उन्होंने बताया कि गत माह 21 जून से 20 जुलाई के मध्य कुल 7267 मरीजों का इलाज किया गया जिसमें 5978 नए मरीज़ शामिल हैं। श्री रॉय ने बताया कि गत माह 55 प्रसूता की नार्मल डिलीवरी कराई गई जबकि 20 महिलाओं का सीज़र किया गया जिसमें सभी सभी जच्चा बच्चा स्वस्थ हैं।

महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मोहसिना खातून

सीएमसी डॉक्टर ए. के राय ने बताया कि महिला चिकित्साहिकारी डॉक्टर मोहसिना खातून व डॉक्टर सरिता प्रसाद व महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रंजीत वर्मा (गायनोलॉजिस्ट), डॉक्टर जितेंद्र कुमार गुप्ता (एनेस्थेसियोलॉजिस्ट) एवं बाल रोग विशषज्ञ डॉ चन्द्रमणि पटेल (पीडियाट्रिशयन) की कड़ी मेहनत के कारण मरीजों की लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि एमसीएच विंग 02 में महिला मरीजों का हर सम्भव इलाज़ व दवा दी जाती है और अस्पताल में पैथोलॉजी की भी सुविधा उपलब्ध है हालांकि रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर की प्रतीक्षा की जा रही है।
डॉक्टर रंजीत वर्मा ने बताया कि एमसीएच विंग 02 में आने वाले मरीजों का कुशलता से परीक्षण कर उनका इलाज किया जाता है। महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मोहसिना खातून ने बताया कि एमसीएच विंग 02 में महिलाओं की हर बीमारी का इलाज होता है हालांकि जच्चा बच्चा का केस सर्वाधिक आता है क्योंकि हमारा प्रयास नार्मल डिलीवरी कराने का होता है और आवश्यकता पड़ने पर यहां सफल ऑपरेशन भी हो जाता है। डॉक्टर चन्द्रमणि पटेल ने बताया कि सीज़र के दौरान उनकी मौजूदगी होती है और शिशुओं के प्राथमिक इलाज़ कर उनको स्वस्थ होने तक देखभाल की जाती है।
बहरहाल एक तरफ जहां धन अभाव के कारण गरीब मरीज़ झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में फंस कर धन व समय बर्बाद कर जच्चा बच्चा के जीवन से खेलने पर मजबूर होता है वहीं मात्र एक पर्चा पर 15 दिनों तक निःशुल्क इलाज़ व दवाएं टाण्डा के एमसीएच विंग 02 में उपलब्ध है जिसका लाभ उठाया जा सकता है।

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