सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और कुत्ता काटने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन की उदासीनता लगातार सामने आ रही है। इसी लापरवाही का भयावह परिणाम बीती मंगलवार रात जलालपुर क्षेत्र के मंगुराडीला गांव में देखने को मिला, जब एक पागल कुत्ते ने ताबड़तोड़ हमला कर गांव में आतंक फैला दिया।
जानकारी के अनुसार, पागल कुत्ते ने गुजराती कन्हैया लाल, अजय और काजल को उनके घर में सोते समय काटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। वहीं संगीता, राम हजूर, सुभाष, किरण, उमेश, राधिका, आंचल, प्रिंस और नदीश को गांव की सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर काट लिया। अचानक हुए हमलों से गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे।
घटना की सूचना फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर गांव की घेराबंदी में जुट गए। घंटों की मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने पागल कुत्ते को घेरकर लाठी-डंडों से पीटकर मार डाला। घटना के बाद पूरे गांव में रातभर भय और तनाव का माहौल बना रहा।
सुबह होते ही सूचना पर तहसीलदार गरिमा भार्गव और खंड विकास अधिकारी दिनेश राम अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे। कुत्ते के हमले में घायल सभी ग्रामीणों को जलालपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नगपुर ले जाया गया, जहां उन्हें एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया गया।
इस संबंध में सीएचसी नगपुर के स्वास्थ्य अधीक्षक डॉ. जयप्रकाश ने बताया कि
“कुल 15 घायलों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया गया है, सभी की हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।”
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने नगर निकायों और प्रशासन को आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी और निगरानी के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि आमजन को ऐसी घटनाओं से बचाया जा सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न तो नियमित टीकाकरण अभियान चल रहा है और न ही आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।




