अम्बेडकरनगर: प्रदेश सहित जनपद में भी असफ़र, ठेकेदार व नेताओं के गठजोड़ ने निर्माण कार्यों की हालत पतली कर दिया है। नेताओं द्वारा चहेते ठेकेदारों को कागजों का पेट भर कर निर्माण कार्य सौंप दिया जाता है और अफसर उस पर काली स्याही से अपारदर्शी बना देता है जिससे निर्माण कार्य बेहद घटिया होता है और उसका खामियाज़ा आमजनता को भुगतना पड़ता है।
कुछ ऐसा ही ताजा मामला जिला पंचायत कार्यालय का भी शिकयत के बाद सामने आया है जहां 97 निर्माण कार्यों का टेण्डर नेता जी द्वारा अपने चहेते ठेकेदारों को कागज़ों का पेट भरते हुए सौंप दिया गया और अधिकारियों ने भी उस पर आंखें बंद कर उक्त गठजोड़ पर मुहर लगा दिया।
अयोध्या मंडल के कमिश्नर से आंनद तिवारी द्वारा की गई शिकायत को संज्ञान में लेते हुए प्राविधिक परीक्षक तकनीकी संपरीक्षा प्रकोष्ठ (टी.ए.सी) अयोध्या मंडल ने जांच का आदेश देते हुए जांच सुनवाई के समय निर्धारित कर दिया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिला पंचायत कार्यालय द्वारा 29 मई को 97 निर्माण कार्यों का टेण्डर निकाला गया था, कुछ कार्यो पर सिर्फ तीन व कुछ पर चार ठेकेदारों ने टेंडर डाला था लेकिन जिन कार्यों पर चार ठेकेदारों द्वारा टेंडर डाला गया था उसे निरस्त कर 15 जुलाई को पुनः टेण्डर आमंत्रित किया गया, जिससे सभी कार्यों को चहेते ठेकेदारों को देकर भ्र्ष्टाचार किया जा सके। उक्त कार्यों में टी.ए.सी ने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को 28 अक्टूबर को 11 बजे जिला पंचायत कार्यालय में सभी संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों के उपस्थित रहने का आदेश किया है। चर्चा है कि निष्पक्ष ढंग से जांच हुई तो जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत कार्यालय के अधिकारियों व चहेते ठेकेदारों की पोल खुल जाएगी और चहेते ठेकेदारों द्वारा 97 निर्माण कार्यों की जमीनी जांच हुई तो घटिया निर्माण की कलई खुल जाएगी। बहरहाल अब सभी की निगाहें टी.ए. सी की तरह से की जाने वाली जांच व उसकी रिपोर्ट पर लगी हुई है।




