अम्बेडकरनगर: जलालपुर तहसील क्षेत्र के मछली गांव में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली पारदर्शी नहीं है और स्पष्ट जानकारी न दिए जाने से भूमि विवाद सुलझने के बजाय भविष्य में और गहराने की आशंका पैदा हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में पर्चा नंबर-5 के वितरण को लेकर अब तक स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। इसी बीच नायब तहसीलदार ने कानूनगो और लेखपाल की मौजूदगी में संबंधित भूमि की पैमाइश कराकर मौके पर खूंटा गड़वा दिया। आरोप है कि इस कार्रवाई से पहले आसपास के खाताधारकों और काश्तकारों को कोई सूचना नहीं दी गई, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई।
लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया स्पष्ट किए बिना भूमि की पैमाइश कराकर एक पक्ष को कब्जा दिलाने जैसी कार्रवाई कर दी। इससे गांव में तनाव का माहौल बन गया है और भविष्य में स्थानीय खाताधारकों के बीच बड़े विवाद की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि पर्चा नंबर-5 का विधिवत वितरण नहीं हुआ था, तो इस तरह की कार्रवाई नियमों के विपरीत मानी जाएगी।
मामला मछली गांव के गाटा संख्या 9 क से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार उक्त गाटा में पैनामेदार द्वारा आधा अंश लिया गया था, लेकिन लेखपाल की कथित लापरवाही के कारण पूरी भूमि भदई पुत्र ललई के नाम दाखिल-खारिज हो गई। इस त्रुटि को लेकर भी ग्रामीणों में रोष है और लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
इस संबंध में चकबंदी नायब तहसीलदार संजय ने बताया कि भवन निर्माण के लिए उच्च अधिकारियों को अनुमति हेतु प्रार्थना पत्र दिया गया था। उसी क्रम में रिपोर्ट लगाने के लिए आबादी की भूमि की पैमाइश कराई गई है।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना और स्पष्ट प्रक्रिया के की गई पैमाइश विभागीय मनमानी को दर्शाती है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि चकबंदी प्रक्रिया पारदर्शी और विवाद-मुक्त तरीके से पूरी हो सके।








