क़ुरआन शरीफ़ मुकम्मल ज़िंदगी का दस्तूर : मौलाना एहतेशाम आलम
अम्बेडकरनगर: दुनिया भर के मुसलमानों के लिए क़ुरआन शरीफ़ सिर्फ़ एक धार्मिक किताब नहीं, बल्कि मुकम्मल ज़िंदगी का दस्तूर है। क़ुरआन शरीफ़ की अज़मत और उसकी तालीमात आज भी इंसानियत को अमन, इंसाफ़ और भाईचारे का पैग़ाम देती हैं।
उक्त बातें जौनपुर से तशरीफ़ लाए आलिम मौलाना मुफ़्ती एहतेशाम आलम ने मदरसा नूरे हक़ इस्लामिया, मुबारकपुर टाण्डा में आयोजित जलसा वार्षिक दस्तार-ए-हिफ़्ज़ के दौरान अपने सम्बोधन में कहीं। उन्होंने कहा कि उलमा और दीन के जानकारों का मानना है कि क़ुरआन शरीफ़ वह इलाही कलाम है जो हज़रत मुहम्मद ﷺ पर नाज़िल हुआ और आज भी उसी शक्ल में महफ़ूज़ है। इसकी हर आयत इंसान को सही और ग़लत में फ़र्क़ सिखाती है और नेक राह पर चलने की दावत देती है।
मौलाना एहतेशाम आलम ने आगे कहा कि क़ुरआन शरीफ़ तमाम इंसानों के लिए हिदायत का ज़रिया है। इसमें इबादत, अख़लाक़, समाज, इंसाफ़, सब्र और रहमत जैसे अहम उसूल बयान किए गए हैं, जो हर दौर और हर समाज में बराबर अहमियत रखते हैं। दीनदारों का विश्वास है कि क़ुरआन की तिलावत से दिलों को सुकून मिलता है और उसकी तालीम पर अमल करने से समाज में अमन व भाईचारा क़ायम होता है।
कार्यक्रम की शुरुआत हाफ़िज़ मोहम्मद अज़हर की तिलावत-ए-क़लाम पाक से हुई। इस जलसे में मदरसे के चार बच्चों हाफ़िज़ आफ़ताब आलम, हाफ़िज़ मोहम्मद साहिल, हाफ़िज़ मोहम्मद अहमद एवं हाफ़िज़ मोहम्मद आफ़ताब को दस्तार-ए-हिफ़्ज़ से नवाज़ा गया।
जलसे की अध्यक्षता हाजी मोहम्मद जावेद ने की, जबकि शम्सुद्दोहा की सरपरस्ती में और मोहम्मद अयाज़ की निगरानी में मौलाना शबीहुल हसनैन ने संचालन किया। कार्यक्रम को सकुशल सम्पन्न कराने में अयाज़ मास्टर, कफील मास्टर, अनवर जमाल मास्टर, हाजी फिरोज़ अहमद (कृषि सेल्स), हाजी जमाल अशरफ़, मोहम्मद मुज़फ़्फ़र, यूसुफ़, जावेद, सुहैल, बबलू, अख़लाक़, वकील, अबू तल्हा, अब्दुल माबूद एडवोकेट सहित स्थानीय पुलिस प्रशासन का सराहनीय सहयोग रहा।
अंत में जलसे के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद जावेद ने कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों और लोगों का आभार व्यक्त किया।




