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जलालपुर तहसील में भ्रष्टाचार और लापरवाही का पर्दाफाश लेकिन सम्बन्धित लेखपाल की बल्ले बल्ले !!

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सप्ताह में दो बार अलग अलग राशि का जारी हुआ आय प्रमाण पत्र, लेखपाल के बजाय निजी ऑपरेटर पर पुलिसिया कार्यवाही

बड़ा सवाल कि लेखपाल का लॉगिन आईडी और पासवर्ड निजी ऑपरेटर के पास कैसे पहुंचे ?

अम्बेडकरनगर: जलालपुर तहसील क्षेत्र में भ्रष्टाचार और लापरवाही की नई बानगी सामने आई है। तहसील प्रशासन में पदस्थ लेखपालों की मनमानी और मिली भगत के चलते एक ही महिला को एक सप्ताह के भीतर दो बार आय प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। मामले की शिकायत होने के बावजूद दोषी लेखपाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, उल्टा एक निजी ऑपरेटर को पुलिस के हवाले कर दिया गया।

मामला जलालपुर तहसील अंतर्गत गौरा महमदपुर गांव का है जहां गांव निवासी सुभाष चंद पुत्र आशाराम ने संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर उपजिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए बताया कि इसी गांव की सुषमा पाठक पुत्री अभिषेक उपाध्याय को 06 जनवरी 2025 को हल्का लेखपाल द्वारा 48 हजार रुपये वार्षिक आय का प्रमाणपत्र जारी किया गया था और मात्र चार दिन बाद यानी 10 जनवरी को पुनः नया प्रमाणपत्र जारी किया गया, जिसमें उनकी आय 42 हजार रुपया दर्शाई गई। इसी आय प्रमाणपत्र के आधार पर सुषमा की आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री पद पर नियुक्ति हो गई। शिकायत मिलने के बाद उपजिलाधिकारी ने हल्का लेखपाल मिथलेश को तलब किया। पूछताछ में लेखपाल ने प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार करते हुए दोष एक निजी ऑपरेटर पर मढ़ दिया। उसने दावा किया कि ऑपरेटर ने उसके आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करते हुए प्रमाणपत्र जारी किया है। उपजिलाधिकारी ने भी बिना गहराई से जांच किए लेखपाल की बात को मान लिया और निजी ऑपरेटर को पुलिस के हवाले कर दिया।
अब सवाल यह उठता है कि लेखपाल का लॉगिन आईडी और पासवर्ड निजी ऑपरेटर के पास कैसे पहुंचे ? यदि यह वास्तव में हुआ है, तो यह एक गंभीर सुरक्षा चूक है, जिसके लिए लेखपाल को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, लेकिन प्रशासन ने लेखपाल को क्लीन चिट देते हुए बलि का बकरा निजी ऑपरेटर को बना दिया।
यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी आंगनबाड़ी भर्ती के दौरान जलालपुर तहसील के अंबरपुर, जलालपुर देहात, हासिमपुर, जिंदासपुर, भियांव सहित कई गांवों में मनमाने तरीके से आय प्रमाणपत्र जारी किए जाने की शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। अंबरपुर में भी एक महिला को मात्र छह दिन में दो अलग-अलग आय प्रमाणपत्र दिए गए एक 48 हजार का और दूसरा 42 हजार का है।
कई मामलों में अमीर लोगों को गरीब दर्शाकर प्रमाणपत्र जारी किए गए, जबकि असली गरीबों की आय अधिक दर्शाई गई। बाद में प्रमाणपत्र निरस्त तो किए गए, लेकिन संबंधित लेखपालों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
वही इस ताजा प्रकरण के मामले में जलालपुर तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित हल्का लेखपाल मिथिलेश कुमार ने अपनी गलती लिखित रूप से स्वीकार कर लिया है। जिस पर विभागीय जांच बैठा कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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