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मुम्बई से आई समाजसेवियों की टीम ने जेल में हुई शब्बीर की मौत पर उठाया गंभीर सवाल

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अम्बेडकरनगर: 78वेन स्वतन्त्रता दिवस से पूर्व 14 अगस्त को जिला कारागार में रेप व पास्को एक्ट में निरुद्ध 26 वर्षीय शब्बीर खान निवासी जनपद बुलढाणा मुम्बई महाराष्ट्र का शव गमछा के सहारे बैरेक में लटकता हुआ मिला था जिससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया था।

उक्त घटना की सूचना पर कैदी मृतक के परिजनों सहित समाजसेवियों की टीम 15 अगस्त को जनपद पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के बाद कब्जे में लिया। इस दौरान मुम्बई से आये समाजसेवी नज़ीब शेख एडवोकेट ने जिला जेल व स्थानीय प्रशासन पर कई गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जेल में आत्महत्या करने की बात हज़म नहीं हो रही है क्योंकि सरकार द्वरा कैदियों की सुरक्षा के लिए जागृत कार्यक्रम चलाया जा रहा है व क़ैदियों के हर पहलुओं पर सख्त निगरानी कर रही है और अगर ऐसी घटना हुई है तो इसके ज़िम्मेदारों पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कैदी शब्बीर की मृत्यु के बाद जेल प्रशासन ने जेल मैनुवल के कई नियमों का पालन नहीं किया और परिजनों के आने से पहले पोस्टमार्टम प्रक्रिया भी शुरू करा दिया जबकि जेल प्रशासन व स्थानीय प्रशासन को परिजनों के आने की सूचना थी। मुम्बई से आए अधिवक्ता में पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग किया है।
बताते चलेंकि 26 वर्षीय शब्बीर खान पुत्र जब्बार खान को अकबरपुर पुलिस ने इसी सप्ताह एक नाबालिग बालिका से दुराचार करने के आरोप में जिला जेल भेजा था। चर्चा है कि मृतक का प्रेम प्रसंग का मामला था जिसमें मृतक को मुम्बई से बुलवाया गया था और फिर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा कर जेल भेज दिया गया था जहां 14 अगस्त को उसका शव फंदे से झूलता मिला था।

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