नकली खोये से बनी खाजा मिठाई की खुलेआम बिक्री, आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़
अम्बेडकरनगर: पूर्वांचल की आस्था और परंपरा से जुड़ा ऐतिहासिक गोविंद साहब मेला इन दिनों श्रद्धा का केंद्र होने के बजाय स्वास्थ्य संकट का कारण बनता जा रहा है। मेले में खुलेआम नकली खोये से बनी खाजा मिठाई की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है, जिससे लाखों मेलार्थियों की सेहत खतरे में पड़ गई है।
स्थानीय लोगों और दुकानदारों के बीच यह चर्चा आम है कि बूढ़नपुर निवासी ‘ठाकुर’ नामक व्यक्ति नकली खोवा की सप्लाई में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। बताया जा रहा है कि यह खोवा मिलावटी पदार्थों और रसायनों से तैयार किया गया है, जो सीधे तौर पर गंभीर बीमारियों को न्योता दे सकता है।
हर तरफ नज़र आती है खाजा की दुकानें
मेला परिक्षेत्र में खाजा की दुकानें एक दो नहीं बल्कि दर्जजों की संख्या में सजी हुई है और मेलार्थियों वर्षों से खाजा मिठाई को प्रसाद के रूप में घरों पर ले जाते हैं और रिश्तेदारों व हित मित्र को भेंट भी करते हैं। मेला में एक ब्रांड की ही दर्जनों बड़ी दुकानें सजी है जहां 300 रुपये से लेकर 400 रुपये तक खाजा बेचा जा रहा है और चर्चा है कि मेला में शत प्रतिशत नकली खोये का प्रयोग हो रहा है।
खाद्य विभाग व मेला प्रशासन की संदिग्ध भूमिका
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतना बड़ा खेल खाद्य सुरक्षा विभाग और मेला प्रभारी की जानकारी के बिना संभव नहीं माना जा रहा, न तो नियमित जांच हो रही है, न ही मिठाइयों के नमूने लिए जा रहे हैं। इससे मिलीभगत की आशंका और गहरी हो गई है।
आस्था के नाम पर सेहत से खिलवाड़
गोविंद साहब मेले में खाजा मिठाई को श्रद्धालु प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं, लेकिन नकली खोवा से बनी मिठाई पेट संबंधी रोग, फूड पॉइजनिंग और दीर्घकालिक स्वास्थ्य नुकसान का कारण बन सकती है। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
मेलार्थियों में भारी आक्रोश
मिठाई खाने के बाद कई लोगों को पेट दर्द, उल्टी और बेचैनी की शिकायतें सामने आई हैं। मेलार्थियों में गहरा आक्रोश है और वे कह रहे हैं कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
जिलाधिकारी से ठोस कार्यवाही की मांग
आमजन, सामाजिक संगठनों और जिम्मेदार नागरिकों ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई कि मेले में बिक रही सभी मिठाइयों की तत्काल जांच कराई जाए, नकली खोवा सप्लाई करने वाले गिरोह पर एफआईआर दर्ज हो, खाद्य विभाग व मेला प्रभारी की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई कर भविष्य के लिए उदाहरण बनाया जाए।
प्रशासन की परीक्षा
यह मामला केवल मिलावट का नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और जनस्वास्थ्य से जुड़ा है। अब देखना यह है कि प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है या फिर जनहित में सख्त कदम उठाकर दोषियों को जेल की राह दिखाता है।
बहरहाल नकली खोवा सपालयर की ही नहीं बल्कि दर्जनों बड़ी बड़ी दुकानें सजाये बैठे खाजा माफियाओं की भी चांदी ही चांदी है तथा खाद्य विभाग की खाना पूर्ति व जांच के नाम पर ठोस कार्यवाही ना कर इतिश्री करने की चर्चाएं भी तेज है। आमजनों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ हो रहा है लेकिन मेला प्रभारी सहित खाद्य विभाग व प्रशासन मूकदर्शक बना तमाशा देख रहा है। (मान्यता प्राप्त पत्रकार आलम खान एडिटर की विशेष रिपोर्ट)





