अम्बेडकरनगर: जलालपुर-रामगढ़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में छह महीने के गर्भ का अबॉर्शन किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों पर चल रही खबरों का संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजय शैवाल ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से मामले की जांच के लिए टीम गठित करने का आग्रह किया। जिलाधिकारी ने तत्परता दिखाते हुए जलालपुर उप जिलाधिकारी राहुल कुमार गुप्ता के नेतृत्व में जांच टीम का गठन कर उसे मौके पर भेजा।
जांच टीम में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. गौतम मिश्रा, क्षेत्राधिकारी अनूप कुमार सिंह, कोतवाल संतोष कुमार सिंह, सीएचसी जलालपुर के प्रभारी डॉ. जयप्रकाश और स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अनिल त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। टीम गुरुवार शाम करीब सात बजे जलालपुर स्थित कुसुम सर्जिकल एंड मैटरनिटी सेंटर पहुंची, जहां अस्पताल का मुख्य गेट बंद मिला। गेट खुलवाकर टीम अंदर दाखिल हुई और अस्पताल के लाइसेंस, भर्ती मरीजों और इलाज की सूची की मांग की। इस पर अस्पताल संचालक के पुत्र सलिल यादव ने बताया कि “अस्पताल संचालक मौजूद नहीं हैं” और यह भी कहा कि लाइसेंस के रिनुअल के लिए आवेदन किया गया है, स्वीकृति मिलने के बाद ही संचालन जारी रहेगा, अन्यथा नियमानुसार बंद कर दिया जाएगा।
मौके पर टीम ने किसी भी प्रकार की ठोस जांच या कार्रवाई नहीं की और थोड़ी देर बाद वापस लौट गई। मीडिया द्वारा पूछे जाने पर जांच अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
टीम के लौटने के बाद बिना कार्रवाई के लौटने को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब मामला गंभीर है और अवैध गर्भपात के आरोप सामने हैं, तो अस्पताल की मुहरबंदी या अभिलेख सील जैसी प्राथमिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में आगे क्या कदम उठाता है।
बहरहाल सोशल मीडिया पर चिकित्सक द्वारा बड़बोलापन करते हुए छः माह का गर्भपात कराने की बात कबूल करता दिखाई दे रहा है हालांकि हम वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करते हैं।




