अम्बेडकरनगर: अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक दशहरा व विजय दशमी पर्व काफी हर्षोउल्लास के साथ शांतिपूर्ण माहौल में सकुशल मनाया गया। इस दौरान पुलिस व प्रशासन काफी सतर्क रहा और लगातार सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जाती रही।
जनपद के अधिकांश स्थानों पर श्री दुर्गा पूजा पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया जबकि टांडा नगर में शुक्रवार को भव्य शोभायात्रा के साथ विसर्जन किया जाएगा। दशहरा पर्व पर रामलीला समितियों द्वारा प्रतीकात्मक रावण को जला कर अधर्म पर धर्म व असत्य पर सत्य की जीत का संदेश दिया गया।
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 02 अक्टूबर गुरुवार को विजयदशमी और दशहरा का पर्व मनाया गया। यह दोनों ही त्योहार अधर्म पर धर्म की विजय का साफ संदेश देते हैं। जब भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था और अधर्म पर धर्म की स्थापना किया था, उसी दिन हर साल देशभर में मेला लगता है और रावण का पुतला बनाकर उसका दहन किया जाता है।
दूसरी तरफ मां दुर्गा के महिषासुर नामक दैत्य पर विजय के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार शारदीय नवरात्र के समापन का प्रतीक भी है। मार्कंडेय पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, देवी दुर्गा ने आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से दशमी तिथि तक महिषासुर से युद्ध किया था।
विजय दशमी व दशहरा पर लोग अपने अंदर की रावण रूपी बुराइयों का दहन करने का भी संकल्प लेते हैं। यह पर्व इस बात का भी संकेत है, कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, वह कभी भी अच्छाई से नहीं जीत सकती।
जनपद में श्री दुर्गा व अन्य प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों के किनारे बड़ा सा गड्ढा बना कर विसर्जन किया गया हालांकि अकबरपुर में समितियों के आक्रोश के बाद नदी में ही विसर्जन किया गया।
श्रवण धाम, महदेवा घाट, काली घाट आदि स्थानों पर नदियों के किनारे अस्थाई बने गड्डों में प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। टांडा नगर के छज्जापुर में स्थित राजघाट पर शुक्रवार को विसर्जन किया जाएगा हालांकि कलश विसर्जन किया जा चुका है। विसर्जन के पूर्व भव्य प्रतिमा विसर्जन शोभा यात्रा निकाली जाएगी और चौक घण्टाघर के निकट श्री केंद्रीय दुर्गा पूजा महासमिति द्वारा महाआरती की जाएगी।बहरहाल जनपद में कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण ढंग से दशहरा व प्रतिमा विसर्जन सकुशल सम्पन्न हुआ जबकि टांडा नगर में शुक्रवार को विर्सजन किया जाएगा।




