बाल श्रम दीमक की तरह बच्चों के बचपन खुशहाली को खा जा रही है – मनोज
अम्बेडकरनगर श्रम विभाग दलालों और चाटूकारों से घिरा हुआ है जिसके कारण बच्चों के बचपन को दीपक की तरह खा जा रहा है, श्रम विभाग बाल श्रमिकों के लिए सिर्फ छलावा बन कर रह गया है।
उक्त दावा मानवाधिकार कार्यकर्ता जीवन ज्योति सेवा संस्थान के सचिव मनोज कुमार सिंह ने करते हुए बताया बाल मजदूरी दीमक की तरह है, जो बच्चों के जीवन के खुश हाली को धीरे-धीरे खा जा रही है। इसे रोकने के लिए कई सरकारी गैर सरकारी संस्थाएं अपने स्तर से काम कर रही हैं। फिर भी विभागीय अधिकारियों की असंवेदनशीलता और बाल मजदूरी करने वाले लोग से मासिक धन उगाही, शिक्षा व्यवस्था में कमी परिवार की जिम्मेदारी और नशापान के कारण दिन व दिन बाल मजदूरी की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। घर की स्थिति ठीक नहीं रहने मजबूरन माता-पिता के दबाव में घर में कमाऊ सदस्यों के असमय मृत्यु हो जाने, मां बाप की बीमारी, पिता के नशेड़ी व जुआ खेलने की लत होने के कारण भी नौनिहालों का बचपन बाल श्रम की तरफ ले जाता है। कोई बच्चा एक बार बाल मजदूरी के दलदल में फंस गया तो उसके चक्रव्यूह से निकलना मुश्किल हो जाता है। जब हमारे देश का भविष्य कहलाने वाला बचपन दुकानों ढाबों,
गैराजो उद्योग धंधों, सरकारी अधिकारियों वी से द साहूकारों राजनेताओं के आलीशान घरों पर उनके बच्चों की देखभाल, चौका बर्तन भूलने झाड़ू पोछा करने और काम मूवीस बचपन खरीददार मालिकों के यौन हिंसा के शिकार बच्चों का वर्तमान ही अंधेरे में गुम हो गया हो, तो उसे देश का भविष्य क्या होगा? अक्सर देखा गया कि हमारे समाज का प्रबुद्ध वर्ग, तथाकथित सरकारी अधिकारियों, न्यायालय में न्याय लिखने वाले माननीय, डॉक्टर, वकील, राजनेता, व्यवसायिक गानों में नियोजित बच्चों का शोषण भी यही प्रबुद्ध नागरिक ही करता है। घर की हालत को सुधारने के लिए मां-बाप के सपनों को सजाने संवारने के लिए बिकता हुआ बचपन कब, मानव तस्करों बाल तस्करों और यौन शोषण करने वालों के हाथ का शिकार बन जाता है, पता ही नहीं चलता। इस सिसकती बचपन को कुशल बनने वाली सरकारी संस्थाएं श्रम विभाग मानव तस्करी यूनिट,बाल कल्याण समितियां, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन, पुलिस यूनिट, केंद्र व राज्य बाल संरक्षण आयोग तथा राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी सामाजिक संस्थाओं के कार्यरत रहते हुए भी बाल मजदूरी करने वाले अपने मकसद में कामयाब होते जा रहे हैं। जीवन ज्योति सेवा संस्थान जनपद अंबेडकर नगर सहित आसपास के जिलों अयोध्या, सुल्तानपुर, जौनपुर, आजमगढ़, बस्ती आदि जनपद में बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए दशकों से प्रयास रत है। जीवन ज्योति सेवा संस्था के सचिव मनोज कुमार सिंह ने बताया कि अंबेडकर नगर जिला में 21, 22 व 23 में अब तक करीब 141 बाल श्रमिकों को चिन्हित कर श्रम विभाग सहित अन्य सरकारी संस्थाओं को सूचित किया गया जिसमें इन तीन सालों में श्रम विभाग ने एक तिहाई बाल श्रमिकों का रेस्क्यू नहीं कर पाया है। जिन बाल श्रमिक बच्चों को चिन्हित जगह से छुड़ाकर परिवार में भेजा गया है, उनमें कई बच्चों को किसी तरह के सामाजिक सुरक्षा योजनाओं रिहैबिलिटेशन योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। और ना ही चाइल्ड लेबर ट्रैकिंग सिस्टम मैं नाम दर जे हो पाया है। यहां तक कि जब किसी बाल श्रमिकों रेस्क्यू टीम द्वारा रेस्क्यू करते हैं तो कई रसूखदारों नेताओं व अधिकारियों का दबाव बनना शुरू हो जाता है। बाल मजदूरी करने वालों पर मुकदमा पंजीकृत हो। जीवन ज्योति सेवा संस्थान सचिन के दावे के साथ कहां है कि यदि श्रम विभाग पूरी गोपनीयता के साथ हमारे द्वारा उपलब्ध कराए गए बाल श्रमिकों के चिन्हित स्थानों पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलती है तो सैकड़ों बाल श्रमिकों विमुक्त कराकर बाल मजदूरी करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है लेकिन दलालों और चाटूकारों से घिरा श्रम विभाग अंबेडकर नगर सिर्फ और सिर्फ दिखावा भर रह गयी है जो बाल श्रमिकों के साथ छलावा ही है। (मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज कुमार सिंह की कलम से)



