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संपूर्ण समाधान दिवस बना मज़ाक: कुर्सी से गायब अफसरों का डीएम ने रोका वेतन

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अम्बेडकरनगर: तहसील टांडा में 21 फरवरी शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में प्रशासनिक उदासीनता खुलकर सामने आ गई। जनता अपनी फरियाद लेकर पहुंची, लेकिन 21 विभागों के जिम्मेदार अधिकारी बिना सूचना नदारद रहे। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सभी अनुपस्थित अधिकारियों का एक दिन का वेतन रोकते हुए तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है।


संपूर्ण समाधान दिवस मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है, जहां जनसमस्याओं का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण किया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, विद्युत, सिंचाई, लोक निर्माण, समाज कल्याण, पशुपालन सहित कई अहम विभागों के अधिकारी कार्यक्रम से गायब रहे। इससे शिकायतकर्ताओं में रोष देखा गया।
अनुपस्थित अधिकारियों में मुख्य चिकित्साधिकारी, उप निदेशक कृषि, जिला गन्ना अधिकारी, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता), जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला सेवायोजन अधिकारी, अधिशासी अभियंता (जल निगम), अधिशासी अभियंता (लोक निर्माण विभाग), अधिशासी अभियंता (विद्युत वितरण खंड-टांडा), अधिशासी अभियंता (सिंचाई खंड-टांडा), सहायक अभियंता (लघु सिंचाई), चकबंदी अधिकारी टांडा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, उपायुक्त उद्योग तथा सचिव मंडी परिषद टांडा शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि बिना सूचना अनुपस्थित रहना कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही है। यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आगे की विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि अब जवाबदेही तय होगी और जनसमस्याओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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