अम्बेडकरनगर: आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया के दौरान राजस्व विभाग के लेखपालों द्वारा आय प्रमाण पत्र में की गई अनियमितता अब बड़ा विवाद बनती जा रही है। आरोप है कि लेखपालों ने मनमाने ढंग से आय प्रमाण पत्र जारी किए, जिससे कई पात्र अभ्यर्थी बाहर हो गए और अपात्रों को लाभ मिल गया। इस पूरे मामले को लेकर अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है।
जलालपुर तहसील के गौरा महमदपुर निवासी सुभाष द्वारा पूर्व उपजिलाधिकारी पवन कुमार जायसवाल को शिकायत पत्र सौंपते हुए बताया था कि हल्का लेखपाल मिथिलेश यादव ने एक महिला के नाम पर सप्ताह भर में दो अलग-अलग आय प्रमाण पत्र जारी कर दिए। पहले प्रमाण पत्र में आय 48 हजार रुपये और दूसरे में 42 हजार रुपये दर्शाई गई। इसी कारण उनकी बहन जो मेरिट सूची में थी, चयन से बाहर हो गई।शिकायत के बाद एसडीएम पवन कुमार जायसवाल द्वारा की गई जांच में लेखपाल ने अपनी गलती स्वीकार भी किया।, इसके बाद तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव को कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
इसी तरह भियांव ब्लॉक के बेरमा गांव में भी एक अभ्यर्थीनी भारती ने शिकायत की कि एक बड़े काश्तकार को गरीबी रेखा के नीचे का प्रमाण पत्र दे दिया गया, जबकि वास्तविक रूप से गरीबों रेखा के नीचेजीवन यापन कर रहे मेरे परिवार का अधिक आय का प्रमाण पत्र देकर सूची से बाहर कर दिया गया। इसी प्रकार अंबरपुर, हासिमपुर, जिंदासपुर, जलालपुर देहात समेत दर्जनों गांवों से इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आई हैं। अंबरपुर में तो एक महिला का छह दिन के भीतर दो अलग-अलग आय प्रमाण पत्र जारी किए गए। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि लेखपालों ने रिश्वत लेकर कम आय का प्रमाण पत्र जारी किया। हालांकि कुछ मामलों में प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए गए, लेकिन लेखपालों को क्लीन चिट दे दी गई, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी है।
इस पूरे मामले पर जब तहसीलदार गरिमा भार्गव से बात की गई तो उन्होंने गोल मटोल जवाब देते हुए बताया कि दो लेखपालों पर विभागीय जांच चल रही है, अन्य की भी जांच प्रक्रिया में है। लेकिन जब उनसे आदेशों की प्रति मांगी गई, तो उन्होंने देने से इनकार कर दिया। पूर्व उप जिलाधिकारी पवन कुमार जायसवाल और वर्तमान जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला को भी इस संबंध में पत्र सौंपा गया था। लेकिन उपजिलाधिकारी के तबादले के बाद इस पूरे मामले को तहसीलदार द्वारा दबाने की कोशिश किए जाने का आरोप लग रहा है।
कड़ी मेहनत से पढ़ाई करने वाले प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के साथ हो रहा यह अन्याय, प्रशासनिक निष्क्रियता और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।




