अम्बेडकरनगर: अंतर्राष्ट्रीय मुशायरा संचालक व शायर अनवर जलालपुरी की याद में हंसवर स्थित चौक के मौला मस्जिद के निकट “अनवर जलालपुरी की शख्सियत” कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
उक्त कार्यक्रम मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के वरिष्ठ शिक्षक मोहम्मद असलम खान की अध्यक्षता व शायर कमर जीलानी टांडवी के संचालन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. दस्तगीर अंसारी टांडवी ने कहा कि अनवर जलालपुरी ने अपनी शायरी में उर्दू के आसान लफ़्ज़ों का इस्तेमाल करके अवाम तक पहुंचाने का काम किया है।
उनकी शायरी नई पीढ़ी के लिए किसी रहनुमा (पथप्रदर्शक) की तरह राह दिखाती है। उन्होंने अपनी शायरी को लफ़्ज़ों की जादूगरी से आज़ाद रखकर उर्दू शायरी को नई ऊंचाइयां देते हुए शायरों को नई सीख देने का काम किया है।शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि अनवर जलालपुरी ने अपनी शायरी के माध्यम से समाज को हमेशा एकजुट रहने का पैगाम दिया। उन्होंने सिर्फ साहित्य के क्षेत्र में ही काम नहीं किया, बल्कि जलालपुर में इंटर कालेज की स्थापना करके शिक्षा की भी लौ जलायी। इंसाफ तन्वी ने कहा कि अनवर जलालपुरी इस जिले की मशहूर नाजिम मुशायरा (मुशायरा संचालक) थे, जिन्होंने उर्दू दुनिया में इस जिले का नाम रोशन किया है।
राशिद अनवर राशिद ने अनवर जलालपुरी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. दस्तगीर टांडवी को शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कमर जिलानी टांडवी ने शेर पढ़ा कि फजल ओ करम है रब का खुसूसी इनाम है, जिंदा जहां में आज भी अनवर का नाम है।हास्य व्यंग्य के शायर हलचल टांडवी ने शेर पढ़ा कि आज के इस दौर में फनकार होना चाहिए, जिंदा रहने के लिए मक्कार होना चाहिए। शाद अकबरपुरी ने कहा मोहब्बत में अदावत हो रही है, सरासर बगावत हो रही है। राशिद अनवर राशिद ने कहा रंज ओ ग़म से है जहां की जेबाई, रात से दिन ने आबरू पाई।सईद टांडवी ने कहा बजाहिर देखने में वह बड़ा मासूम लगता है, मगर जब बोलता है मुंह से चिंगारी निकलती है। इंसाफ टांडवी ने कहा कर न देना कभी ज़ुल्मत के हवाले मुझको, मैं तराना हूं मोहब्बत का तू गा ले मुझको। अफरोज रौशन किछौछवी ने कहा लोग जीते हैं मौत की खातिर, जिंदगी तो फकत बहाना है। डॉ.दस्तगीर टांडवी ने कहा इमदाद करते रहिए गरीबों की उम्र भर, पैगाम दस्तगीर है यह सब के वास्ते।असलम भुसावली ने कहा सच कहूं मुझको यह उनवान बुरा लगता है जुल्मी सहता हुआ इंसान बुरा लगता है।अकरम भूलेपुरी ने कहा कैसे हो इंसाफ यहां पर थोड़ी सी दुश्वरी है, मुंसिफ भी सरकारी है और कातिल भी सरकारी है। इसके अलावा अन्य शायरों ने अपना कलाम पेश किया।





