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अंतिम समय में अपनों ने की बेवफाई, तो इंसानियत ने निभाया आखिरी फ़र्ज़

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अम्बेडकरनगर: ज़िंदगी में सब कुछ खो देने के बाद जब अपनों ने भी अंतिम समय में साथ छोड़ दिया, तब इंसानियत ही कैलाश वर्मा की आख़िरी पहचान बनी। संतकबीरनगर जनपद के थाना घनघटा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छपरा मगवीं निवासी कैलाश वर्मा पुत्र दालसिंगार वर्मा का इलाज के दौरान महामाया मेडिकल कॉलेज सदरपुर में निधन हो गया। परिजनों के न आने पर समाजसेवियों और संवेदनशील लोगों ने उनका अंतिम संस्कार कर मानवता की मिसाल पेश की।
बताया गया कि कैलाश वर्मा ने अपनी पूरी संपत्ति बेच दी थी और आर्थिक व मानसिक रूप से टूट चुके थे। उनकी पत्नी और बच्चे अमृतसर में किराए के मकान में रहते हैं। करीब दस दिन पहले वे जहांगीरगंज क्षेत्र में बीमार हालत में सड़क किनारे पड़े मिले थे। यह दृश्य जिसने भी देखा, उसका दिल दहल गया।


उसी वक्त ग्राम कटघर निवासी बृजेश पांडेय पुत्र ने इंसानियत दिखाते हुए उन्हें जहांगीरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज सदरपुर रेफर किया। बृजेश पांडे ने 108 व 112 एंबुलेंस सेवा की मदद से उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया और लगातार दस दिनों तक उनके साथ अस्पताल में ऐसे डटे रहे कि मानों कोई अपना ही हो। इलाज के दौरान कैलाश वर्मा ने दम तोड़ दिया। इंस्ट्राग्राम पर वीडियो देखने के लिए इसे टच करें।
मेडिकल कॉलेज चौकी प्रभारी ने मृतक की पत्नी और बच्चों से संपर्क कर निधन की सूचना दी, लेकिन वे अंतिम संस्कार में आने को तैयार नहीं हुए। यह खबर हर संवेदनशील दिल को चीर देने वाली थी।
ऐसे कठिन समय में समाजसेवी बरकत अली आगे आए। मृतक की चचेरी बहन किशा देवी (ग्राम प्रधान, कियामपुर राजेसुल्तानपुर), विजेंद्र वर्मा और दिनेश गुप्ता की मौजूदगी में बरकत अली के सहयोग से जौहरडीह घाट पर देर रात अंतिम संस्कार कराया गया। ग्राम प्रधान जमुनीपुर सुभाष वर्मा ने लकड़ी की व्यवस्था कराई।इस खबर की वीडियो फेसबुक पर देखने के लिए 💐 इसे टच करें
कनक हॉस्पिटल के डॉक्टर आलोक पांडेय भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए और श्रद्धांजलि अर्पित की।
जब अपनों ने मुँह मोड़ लिया, तब समाज ने कंधा दिया। कैलाश वर्मा की लावारिस मौत ने व्यवस्था और रिश्तों पर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन साथ ही यह भी साबित किया कि इंसानियत आज भी ज़िंदा है—बस उसे निभाने वाले लोग चाहिए।

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