तो क्या औपचारिकता बनकर रह गई मासिक बैठक !
अम्बेडकरनगर: कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला उद्योग बंधु की मासिक बैठक उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक दोनों ही बैठक में उपस्थित नहीं रहे। जिले के उद्योग व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई यह बैठक व्यापारियों की नजर में केवल औपचारिकता साबित हुई, जिससे उनमें गहरा आक्रोश देखने को मिला।
व्यापारियों का कहना है कि उद्योग बंधु जैसी अहम बैठक में डीएम और एसपी की गैरमौजूदगी प्रशासन की उदासीनता को दर्शाती है। जब शीर्ष अधिकारी ही मौजूद नहीं होंगे तो समस्याओं पर ठोस निर्णय कैसे लिए जाएंगे।
बताया गया कि जिला उद्योग बन्धु व जिला व्यपार बन्धु की संयुक्त बैठक के समय में कई बार बदलाव किया गया, जिससे व्यापारी संगठनों में भ्रम की स्थिति बनी रही। इसी कारण अनेक व्यापारी और संगठन बैठक में शामिल नहीं हो सके। नतीजतन, बैठक में व्यापारी संगठनों की सहभागिता काफी कम नजर आई, जिससे उद्योग बंधु के उद्देश्य पर सवाल खड़े हो गए। उक्त बैठक की अध्यक्षता डीआरडीए अनिल कुमार सिंह सहित वन अधिकारी व एडिशनल एसपी पश्चिमी ही मौजूद रहे।
बैठक में व्यापारियों ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठा लेकिन निर्णय लेने की क्षमता के अभाव में चर्चा केवल औपचारिक बिंदुओं तक ही सीमित रह गई। कई व्यापारियों ने आरोप लगाया कि हर माह बैठक तो होती है, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं और गत माह भी बैठक में डीएम एसपी नहीं रहे जिससे कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाता है।
व्यापारियों में इस बात को लेकर भी नाराजगी देखी गई कि पूर्व बैठकों में उठाए गए मुद्दों की न तो समीक्षा की गई और न ही उनके समाधान की कोई प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इससे मासिक उद्योग बंधु की बैठक खानापूर्ति का माध्यम बनती जा रही है।
व्यापारी संगठनों ने अपेक्षा जताई कि आगामी बैठकों में डीएम-एसपी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और समस्याओं के समाधान के लिए ठोस एवं समयबद्ध निर्णय लिए जाएं, ताकि उद्योग बंधु की बैठक अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर सके।
बहरहाल उद्योग बन्धु की बैठक में डीएम एसपी की लगातार गैर मौजूदगी से व्यपारियो में कहीं न कहीं आक्रोश नज़र आता है और व्यपारी कहने पर मजबूर हो रहे हैं कि उद्योग बन्धु की बैठक कहीं औपचारिकता बन कर तो नहीं रह गई है।




