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टाण्डा: तीन बोलीदाता, दो लाख बढ़ोतरी, सिंडिकेट की चर्चा तेज — टैक्सी स्टैंड नीलामी पर खड़े हुए सवाल

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अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त पत्रकार) नगर पालिका टाण्डा के मदनी हाल में आयोजित प्राइवेट टैक्सी स्टैंड ठेके की नीलामी प्रक्रिया पर सिंडिकेट की आशंका गहरा गई है। सरकारी दर 90 लाख रुपये तय होने के बावजूद बोली की शुरुआत 83 लाख से कर दी गई, जिस पर प्रभारी ईओ नीरज गौतम ने कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रक्रिया रुकवाई और फटकार लगाई। इसके बाद नीलामी पुनः सरकारी दर 90 लाख से शुरू कराई गई, लेकिन कई राउंड के बावजूद बोली महज दो लाख की बढ़ोतरी के साथ 92 लाख पर ही सिमट गई।


नीलामी में रईस अहमद ने 92 लाख रुपये की अंतिम बोली लगाकर ठेका हासिल किया। वहीं इंद्रभान सिंह और अमजद खान ने भी बोली में भाग लिया, जबकि रंजन पांडेय और हरिश्चंद्र वर्मा शामिल नहीं हो सके। सीमित प्रतिस्पर्धा और मामूली बढ़ोतरी ने नीलामी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जाता है कि पिछले वित्तीय वर्ष में यही ठेका 72 लाख रुपये में हुआ था। इस बार वित्तीय वर्ष शुरू होने के नौवें दिन नीलामी कराई गई, लेकिन एक वर्ष के अनुभव की शर्त के कारण कई संभावित आवेदक हिस्सा नहीं ले सके। जबकि सूक्ष्म एवं लघु उद्यम आदेश 2012 की सार्वजनिक खरीद नीति के अनुच्छेद 16 के तहत अनुभव शर्त में छूट देने की व्यवस्था होने के बावजूद शर्त लागू रहने से भी सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार पूर्व ठेकेदार द्वारा बकाया धन जमा नहीं किया गया है, जिस पर प्रभारी ईओ नीरज गौतम ने आरसी जारी करने की बात कही है।
नगर में चर्चा है कि टैक्सी वसूली में ठेकेदारों का एक सिंडिकेट सक्रिय है, जिसके चलते नीलामी में प्रतिस्पर्धा सीमित रहती है और बोली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाती। सरकारी दर से महज दो लाख की बढ़ोतरी ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब नीति में छूट का प्रावधान था तो अनुभव की शर्त क्यों रखी गई, और क्या इससे प्रतिस्पर्धा सीमित कर सिंडिकेट को अप्रत्यक्ष बढ़ावा दिया गया? नगर पालिका की नीलामी प्रक्रिया पर उठे इन सवालों ने पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है और चर्चा है कि उक्त नीलामी को अगर अनुभव की शर्त को हटा कर खुली बोली कराई जाए तो सम्भवता बोली एक करोड़ रुपये से अधिक अवश्य पहुंच जाएगी जिससे नगर पालिका का बड़ा लाभ होगा।

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