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लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सज़ा पाई… खान मुबारक की मौत के बाद भी परिवार पर कानून का शिकंजा

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मृतक माफिया के परिवार पर शिंकजा कसने वाले एसएसआई को मिली थानाध्यक्ष की कुर्सी

अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त) कभी जिले की अपराध दुनिया में खौफ का दूसरा नाम रहे माफिया खान मुबारक की मौत के बाद भी उसके परिवार का नाम विवादों और पुलिस कार्रवाई से पीछा नहीं छुड़ा पा रहा है। बसखारी पुलिस ने खान मुबारक की बहन, भांजे और भांजी को चोरी के एक मुकदमे में गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 43 लाख रुपये से अधिक कीमत के सोने-हीरे के आभूषण और एक लाख रुपये नकद बरामद करने का दावा किया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

पुलिस के अनुसार सोमवार तड़के मकोइया गांव में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बरामदगी में रानी हार, हीरे का नेकलेस, झुमके, अंगूठियां समेत बड़ी मात्रा में कीमती आभूषण और एक लाख की नकदी शामिल है। पुलिस का कहना है कि बरामद माल चोरी के मुकदमे से संबंधित है।

इस कार्रवाई की सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि अभियान की अगुवाई करने वाले बसखारी थाने के वरिष्ठ उपनिरीक्षक शशांक कुमार शुक्ला को पुलिस अधीक्षक सुश्री प्राची सिंह ने तत्काल प्रभाव से मालीपुर थाने का प्रभारी निरीक्षक (थानाध्यक्ष) नियुक्त कर दिया है। जिले में इसे एक बड़ी उपलब्धि और चर्चित कार्रवाई के बाद मिली जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि खान मुबारक के परिजनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने वाली टीम के प्रमुख चेहरे को यह पदोन्नति जैसी जिम्मेदारी उसी कार्रवाई का पुरस्कार मानी जा रही है, हालांकि पुलिस विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

खान मुबारक का नाम वर्षों तक पूर्वांचल की अपराध कथाओं में प्रमुखता से लिया जाता रहा। उसके खिलाफ दर्ज मामलों, गैंगवार और पुलिस अभियानों की चर्चा लंबे समय तक सुर्खियों में रही। उसकी मौत के बाद माना जा रहा था कि परिवार का नाम भी धीरे-धीरे विवादों से दूर हो जाएगा, लेकिन ताजा गिरफ्तारी ने एक बार फिर उस परिवार को सुर्खियों में ला खड़ा किया है। जिले में अब यह चर्चा आम है कि खान मुबारक भले ही इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसका नाम और उससे जुड़ी विरासत अब भी परिवार का पीछा नहीं छोड़ रही। लोगों के बीच यह कहावत दोहराई जा रही है—”लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सज़ा पाई…”

फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायालय भेज दिया है और बरामद जेवरात व नकदी के संबंध में जांच जारी है। वहीं एसएसआई शशांक कुमार शुक्ला की मालीपुर थाने में तैनाती ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है।

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