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टांडा टैक्सी स्टैण्ड ठेका नीलामी में नहीं पहुंचा कोई ठेकेदार, जानिए कारण

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अम्बेडकरनगर: प्रथम श्रेणी की दर्ज़ा प्राप्त नगर पालिका परिषद में आगामी सत्र के लिए टैक्सी स्टैण्ड की सार्वजनिक नीलामी मार्च माह के अंतिम सप्ताह पर भी पूरी नहीं हो सकी है जिससे नगर पालिका को भारी राजस्व हानि भी हो सकती है।


टांडा नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी डॉ आशीष कुमार सिंह द्वारा आगामी सत्र के लिए टांडा नगर के विभिन्न स्थानों के टैक्सी स्टैण्ड हेतु ठेका नीलामी 27 मार्च गुरुवार को 03 बजे आहूत किया गया था। उक्त नीलामी शामिल होने के लिए 26 मार्च बुधवार को नगर पालिका में जमानत राशि जमा करनी थी लेकिन किसी भी संस्था अथवा ठेकेदार द्वारा जमानत राशि नहीं जमा किया गया जिसके कारण नीलामी स्थगित हो गई।
टैक्सी स्टैंड ठेका नीलामी में किसी संस्था अथवा ठेकेदार द्वारा भाग न लेने के पीछे कई कारण बताया जा रहा है। उक्त नीलामी में पिछली बार जहां अनुभव की कैद नहं थी वहीं इस बार एक वर्ष के अनुभव की शर्त लगा दिया गया है जिसके कारण नए लोग हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। चर्चा है कि अगर अनुभव न होता तो कई अन्य लोग ठेका नीलामी में शामिल होते। दूसरी तरफ हैसियत धनराशि गत वर्ष के मुकाबले डबल कर दिया गया है। पिछले वर्ष जहां 25 लाख की हैसितत लगन था वहीं अब 50 लाख की हैसियत रखी गई है। तीसरा मामला जमानत राशि भी बढ़ा दिया गया है, गत वर्ष जहां 03 लाख जमानत राशि थी वहीं इस बार 05 लाख रुपये जमानत राशि रखी गई है। नगर पालिका प्रशासन द्वारा सरकारी बोली 01 करोड़ 21 लाख निर्धारित की गई है जो ठेकेदारों को काफी अधिक लग रही है। बताते चलेंकि टांडा नगर के चौक से सब्ज़ी मंडी के हट जाने के कारण टैक्सी स्टैंड ठेकेदारों को काफी नुकसान सहन पड़ रहा है और शायद इसी लिए कोई ठेकेदार अधिक बोली के लिए नीलामी में नहीं शामिल होना चाहता है।
एक तरफ जहां बात करें कि अनुभव, हैसितत व जमानत राशि ने नीलामी में भाग लेने वाली संस्थाओं व ठेकेदारों के कदम नगर पालिका कार्यालय तक जाने से रोक दिया है वहीं कुछ ठेकेदारों द्वारा नीलामी में न शामिल हो कर नगर पालिका प्रशासन को सरकारी बोली कम कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। जानकर बताते हैं कि अगर तीन बार ठेका नीलामी का समय निर्धारित होता है और कोई संस्था अथवा ठेकेदार उसमें भाग नहीं लेता है तो नगर पालिका प्रशासन सरकारी बोली को कम कर सकता है। बताते चलेंकि नगर पालिका द्वारा जारी सत्र में 05 माह तक पुराने ठेकेदारों के माध्यम से टोकन वसूली कराई गई थी और काफी हो-हल्ला मचने के बाद 07 माह की नीलामी 79 लाख रुपये में कराई गई थी। चर्चा है कि अगर टैक्सी स्टैंड ठेका नीलामी नहीं हो सकी तो पुनः नगर पालिका पुराने ठेकेदारों से मिल कर टोकन वसूली कराएगा।
बहरहाल टैक्सी स्टैंड ठेका नीलामी में अनुभव की शर्त, हैसियत व जमानत राशि की बढ़ी रकम के साथ सरकारी बोली कि धनराशि ने भी ठेकेदारों के कदम रोक दिया है और देखने वाली बात होगी कि नगर पालिका प्रशासन आगामी सत्र में टैक्सी स्टैंड की वसूली किस आधार पर करता है।

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