अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान, एडिटर-मान्यता प्राप्त)। विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हज़रत मौलाना सैय्यद शाह मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी के 640वें वार्षिक उर्स का भव्य और रूहानी समापन दरगाह किछौछा स्थित खानकाह अशरफिया हसनिया सरकारे कला में अकीदत और श्रद्धा के माहौल में हुआ। 28 मोहर्रम की शाम आयोजित अंतिम कुल, विशेष दुआख्वानी और पवित्र तबरुकात की जियारत के दौरान ऐसा भावुक और रूहानी माहौल बना कि लाखों जायरीन की आंखें नम हो गईं। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से पहुंचे अकीदतमंदों ने मखदूम पाक की बारगाह में हाथ उठाकर अपनी मुरादें मांगी और अमन, सलामती व खुशहाली की दुआ की।

उर्स का आयोजन हुजूर कायदे मिल्लत हज़रत अल्लामा मौलाना सैय्यद महमूद अशरफ अशरफी जिलानी (सज्जादानशीन, आस्ताने आलिया अशरफिया हसनिया सरकारे कला, किछौछा शरीफ) की सरपरस्ती में संपन्न हुआ। सज्जादानशीन ने लिबास-ए-गौसिया धारण कर विशेष वार्षिक दुआ कराई। उनकी रूहानी दुआ ने पूरे माहौल को भाव-विभोर कर दिया और हजारों लोग रोते हुए अपने गुनाहों की माफी, मन्नतों की कबूलियत और बेहतर जिंदगी की दुआ करते नजर आए।

विशेष दुआ के दौरान सज्जादानशीन ने खानदान-ए-अशरफिया में आपसी मोहब्बत, एकता और भाईचारे को मजबूत बनाए रखने, सभी बीमारों को जल्द शिफा अता करने, देश-दुनिया में अमन और खुशहाली कायम रहने तथा सभी अकीदतमंदों की हर परेशानी, मुसीबत और तकलीफ दूर करने की दुआ मांगी। दुआ के समापन पर “आमीन” की सदाओं से पूरा परिसर गूंज उठा।

27 मोहर्रम को दरगाह किछौछा शरीफ से मुये मुबारक का जुलूस खानकाह सरकारे कला पहुंचा, जहां मुये मुबारक और कदमे रसूल की जियारत कराई गई। वहीं 28 मोहर्रम को पालकी पर लिबास-ए-गौसिया का भव्य जुलूस जामे अशरफ (सरकारे कला) पहुंचा, जहां सज्जादानशीन की निगरानी में लिबास-ए-गौसिया सहित अन्य बहुमूल्य तबरुकात की जियारत कराई गई। इन पवित्र निशानियों की एक झलक पाने के लिए जायरीनों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

दुआ के उपरांत मौजूद श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी और हमेशा प्रेम, सौहार्द तथा भाईचारे के साथ रहने का संकल्प लिया। पूरा परिसर इंसानियत, मोहब्बत और सूफी परंपरा के संदेश से सराबोर नजर आया।
बताते चलें कि 26 मोहर्रम की शाम परचमकुशाई और अशरफी तराना के साथ उर्स का शुभारंभ हुआ था। इसके बाद मस्जिद-ए-आला हजरत अशरफी मियां में हल्का-ए-जिक्र सहित विभिन्न रूहानी कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें देश-विदेश से आए लाखों जायरीनों ने शिरकत की।इस अवसर पर सैय्यद जलालुद्दीन अशरफ, सैय्यद गौस अशरफ, अशरफे मिल्लत सैय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी, मौलाना सैय्यद आरिफ अशरफ, सैय्यद मकसूद अशरफ (अरशद मियां), सैय्यद असलम अशरफ, सैय्यद निजामुद्दीन अशरफ, सैय्यद आलमगीर अशरफ, सैय्यद राशिद अशरफ, सैय्यद सिराजुद्दीन अशरफ, सैय्यद अबूबकर शिबली, सैय्यद हम्माद अशरफ, सैय्यद हसन कमाल अशरफ, सैय्यद इसरार अशरफ सहित खानदान-ए-अशरफिया के अनेक गणमान्य सदस्य मौजूद रहे।




