रसीद मांगने पर खर्चे के नाम पर रकम मांगने का आरोप, बुधवार को उद्योग बंधु की बैठक में गूंज सकता है मामला!
अम्बेडकरनगर। बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। टांडा में एक कपड़ा कारोबारी ने विद्युत विभाग के कर्मचारियों पर बिना पूर्व सूचना और नोटिस के बिजली कनेक्शन काटने तथा दोबारा कनेक्शन जोड़ने के नाम पर दो हजार रुपये मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। कारोबारी का आरोप है कि जब उन्होंने मांगी गई रकम की रसीद मांगी तो कर्मचारियों ने रसीद देने से इनकार करते हुए इसे खर्चे के लिए जरूरी बताया। इस मामले में पीड़ित व्यापारी ने जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के उपायुक्त/महाप्रबंधक को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। मंगलवार को आयोजित होने वाली उद्योग बंधु की बैठक में भी यह मामला उठने की संभावना है।
मोहल्ला काजीपुरा निवासी कपड़ा कारोबारी रईस अहमद पुत्र नियाज अहमद ने अपनी शिकायत में बताया है कि वर्तमान समय में कपड़े का कारोबार काफी मंदा चल रहा है, जिसके चलते उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद वह लगातार अपने विद्युत बिलों का भुगतान करते आ रहे हैं। उन्होंने अपने विद्युत खाता संख्या 5993044000 का हवाला देते हुए 9 फरवरी, 26 जुलाई, 30 अगस्त और 28 सितंबर 2026 को किए गए भुगतान का उल्लेख भी शिकायत में किया है।
व्यापारी के मुताबिक, 25 अक्टूबर को विद्युत विभाग के कर्मचारी उनके घर पहुंचे और बिजली बिल जमा करने को कहा। इस पर उन्होंने अगले दिन यानी 26 अक्टूबर को भुगतान करने का भरोसा दिया। आरोप है कि भुगतान के लिए समय देने के बावजूद विभागीय कर्मचारियों ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उनका विद्युत कनेक्शन काट दिया। इससे उनका कारोबार प्रभावित होने के साथ ही परिवार को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप कनेक्शन दोबारा जोड़ने के नाम पर कथित रूप से दो हजार रुपये मांगने को लेकर लगाया गया है। रईस अहमद का कहना है कि कर्मचारियों ने उनसे दो हजार रुपये देने पर कनेक्शन जोड़ने की बात कही। जब उन्होंने इस रकम की रसीद मांगी तो कथित तौर पर रसीद देने से साफ इनकार कर दिया गया। आरोप है कि कर्मचारियों ने कहा कि यह पैसा खर्चे के लिए चाहिए। व्यापारी का कहना है कि अब तक उनका कनेक्शन भी नहीं जोड़ा गया है।
दो हजार रुपये किस मद में? रसीद देने से परहेज क्यों?
इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि कनेक्शन जोड़ने के लिए दो हजार रुपये का कोई निर्धारित विभागीय शुल्क है तो उसकी आधिकारिक रसीद क्यों नहीं दी जा रही है? यदि यह विभागीय शुल्क नहीं है तो फिर किस आधार पर रकम की मांग की जा रही है? क्या किसी उपभोक्ता से सरकारी प्रक्रिया के इतर खर्चे के नाम पर पैसा मांगा जाना उचित है? व्यापारी ने इन्हीं सवालों के साथ विभागीय अधिकारियों से मामले की जांच कराकर जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
उद्योग बंधु की बैठक में उठ सकता है बिजली विभाग का मामला
बुधवार को आयोजित होने वाली उद्योग बंधु की बैठक में व्यापारी की यह शिकायत चर्चा का विषय बन सकती है। बैठक में मामला उठने पर बिजली विभाग के अधिकारियों से बिना नोटिस कनेक्शन काटने और कनेक्शन जोड़ने के नाम पर कथित रूप से दो हजार रुपये मांगने के आरोपों पर जवाब मांगा जा सकता है। व्यापारियों से जुड़े इस मामले में जिला उद्योग विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी शिकायत का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराते हैं और पीड़ित व्यापारी को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
फिलहाल रईस अहमद ने उपायुक्त/महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र को शिकायती पत्र देकर विधिक कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, विद्युत विभाग के कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभाग का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।




