अम्बेडकरनगर: सरकारी नियमों को ताक पर रखते हुए एक आयुर्वेदिक चिकित्सालय का नाम बिना किसी शासनादेश के बदले जाने का मामला सामने आया है। आरटीआई के माध्यम से हुए खुलासे के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 1995 के दिसंबर माह में तत्कालीन राज्यपाल द्वारा उद्घाटित श्रीमती गायत्री देवी आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर का नाम बाद में बदलकर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि नाम परिवर्तन से संबंधित कोई भी शासनादेश, अधिसूचना या वैधानिक अनुमति मौजूद नहीं है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब एक सामाजिक कार्यकर्ता अमित मांझी द्वारा दाखिल आरटीआई के जवाब में विभाग ने स्वीकार किया कि नाम परिवर्तन से संबंधित कोई आधिकारिक दस्तावेज रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। इससे यह स्पष्ट हो गया कि अस्पताल का नाम नियमों को दरकिनार कर बदला गया।
ज्ञात दिलाते चलेंकि आलापुर क्षेत्र के विकास पुरुष के नाम से प्रसिद्ध स्व. सालिक राम शुक्ला की माता श्रीमती गायत्री देवी के नाम पर तत्कालीन राज्यपाल के करकमलों द्वारा शुभारम्भ किया गया था।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस कदम को इतिहास और जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया है। लोगों का कहना है कि जिस अस्पताल का उद्घाटन स्वयं राज्यपाल द्वारा किया गया हो, उसके नाम को बिना वैधानिक प्रक्रिया के बदलना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।

मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। नागरिकों ने सवाल उठाया है कि आखिर यह निर्णय किस अधिकारी या कर्मचारी ने लिया और किसके आदेश पर लागू किया गया। साथ ही मांग की जा रही है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग और शासन इस गंभीर अनियमितता पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाता है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।




