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पैसे के दम पर वकील बनने का खेल! एलएलबी परीक्षा में ‘फर्जी लेखन’ का सनसनीखेज आरोप, 25 हजार में तय–

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अम्बेडकरनगर: बीएनकेबी पीजी कॉलेज अकबरपुर में चल रही एलएलबी परीक्षा ने शिक्षा नहीं, बल्कि खुलेआम सौदेबाज़ी का चेहरा दिखा दिया है। सीबी सिंह लॉ कॉलेज का परीक्षा केंद्र बने इस कॉलेज में 30 जनवरी से 05 फरवरी तक आयोजित एलएलबी की परीक्षाओं के दौरान गंभीर आरोप सामने आए हैं कि कई छात्र परीक्षा में मौजूद ही नहीं हैं, इसके बावजूद उनकी उत्तर पुस्तिकाएं कॉलेज परिसर के भीतर ही लिखी जा रही हैं। यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से चल रहा है और जिम्मेदारों की चुप्पी ने शक को और गहरा कर दिया है।


सूत्रों के अनुसार, गैरहाज़िर छात्रों की कॉपियां लिखवाने के बदले 25 हजार रुपये प्रति छात्र की दर से ऑनलाइन वसूली की जा रही है। हाल ही में तीन छात्रों से कुल 75 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए जाने का मामला उजागर हुआ है, जिससे यह साफ हो गया है कि यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित रैकेट की तरह संचालित हो रहा है। सवाल यह है कि जब पैसा ऑनलाइन लिया जा रहा है, तो क्या लेनदेन के डिजिटल सबूतों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
इस कथित फर्जीवाड़े में एलएलबी तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के छात्र फैसल इकबाल तथा पांच वर्षीय पाठ्यक्रम के छात्र मो. इस्माइल और अमनउल्लाह खान के नाम चर्चा में हैं। आरोप है कि इन छात्रों की कॉपियां पैसे के बदले लिखी जा रही हैं, जबकि वे स्वयं परीक्षा कक्ष में उपस्थित नहीं रहते। इतना ही नहीं, सूत्र बताते हैं कि इनके अलावा भी कई अन्य छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं इसी तरह ‘सेट’ कराई जा रही हैं, जिनके नाम धीरे-धीरे सामने आ सकते हैं, ऐसा चर्चा का विषय बना हुआ है।
सबसे गंभीर सवाल परीक्षा की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। जनचर्चा है कि जब छात्र अनुपस्थित हैं, तो उनकी उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा कक्ष तक पहुंच कैसे रही हैं? कौन लोग कॉपियां लिख रहे हैं और किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है? यदि यह सब कॉलेज परिसर के भीतर हो रहा है, तो परीक्षा केंद्र प्रभारी, कक्ष निरीक्षक और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठना लाज़िमी है।
यह मामला केवल नकल या परीक्षा में गड़बड़ी का नहीं है, बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा हुआ है। जिस डिग्री के सहारे कल अदालतों में वकालत की जाएगी, अगर वही डिग्री पैसे के दम पर मिल रही है, तो आम आदमी को इंसाफ़ कौन दिलाएगा? यह सीधे-सीधे कानून की पढ़ाई और न्याय प्रणाली का मज़ाक उड़ाने जैसा है।
हैरानी की बात यह है कि इतने संगीन आरोपों के बावजूद अब तक कॉलेज प्रशासन या परीक्षा से जुड़े किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। छात्र संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि कॉलेज परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कराई जाए, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की हम पुष्टि नहीं करते हैं लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के स्क्रीन शॉर्ट की फॉरेंसिक पड़ताल होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर समय रहते इस मामले को दबाने की कोशिश हुई, तो यह साफ हो जाएगा कि यहां परीक्षा नहीं, बल्कि खुलेआम डिग्री का सौदा चल रहा है।

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