अम्बेडकरनगर: प्रसिद्ध शायर राहत इंदौरी की 76वीं जयंती के अवसर पर हंसवर स्थित भूलेपुर में एक भव्य और यादगार मुशायरे का आयोजन किया गया। यह साहित्यिक कार्यक्रम शायरी प्रेमियों के लिए एक खास अवसर साबित हुआ, जहां राहत इंदौरी की यादों, उनके फन और उनके विचारों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुशायरे का आयोजन पूर्व विधायक स्व.हाजी अजीमुलहक पहलवान के ज्येष्ठ पुत्र सपा नेता मुसाब अजीम के संरक्षण में किया गया, जिसकी अध्यक्षता इकरामुल हक अंसारी ने किया और कार्यक्रम का सफल और प्रभावशाली संचालन अबूसाद अंसारी ने किया।
इस अवसर पर हाफिज महबूब आलम बतौर अतिथि अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत राहत इंदौरी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए की गई।मुख्य वक्ता के रूप में सितारे उर्दू अवार्ड से सम्मानित मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि राहत इंदौरी की शायरी में देशभक्ति, इंसानियत, सच्चाई और बेबाकी साफ नजर आती थी।उन्होंने अपनी शायरी के माध्यम से समाज की सच्चाइयों को बेखौफ अंदाज में पेश किया और यही वजह है कि वे हर वर्ग में समान रूप से लोकप्रिय रहे। उनकी शायरी ने भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी श्रोताओं के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।संरक्षक मुसाब अजीम ने अपने संबोधन में कहा कि राहत इंदौरी ने मुशायरे की परंपरा को एक नया मिजाज दिया। उन्होंने शायर और श्रोता के बीच की दीवार को तोड़ते हुए शायरी को आम आदमी से जोड़ा। उनकी आवाज, अंदाज और विचारों ने मुशायरों को जीवंत बना दिया और युवा पीढ़ी को भी शायरी से जोड़ा। डॉ.अजीम अशरफ ने कहा कि राहत इंदौरी ने आम आदमी की जिंदगी को अपनी शायरी में पेश कर लोगों को अपना दीवाना बना लिया। उन्होंने फिल्म खाकी, मर्डर आदि फिल्मों में गीत लिखकर फिल्मी दुनिया में भी भी अपनी एक अलग पहचान बनाई।अबूसाद अंसारी ने कहा कि राहत इंदौरी ने जिस मजबूती के साथ न्याय, मानवता, भाईचारे और विश्व शांति की आवाज बुलंद की, वह आज भी प्रासंगिक है। उनकी शायरी समाज को जागरूक करने वाली थी और हमेशा सच्चाई के पक्ष में खड़ी रही।मुशायरे में राहत नवाज, हाफिज मोहम्मद अनस, डॉ. अजीम अशरफ, इकरामुल हक, अबूसाद अंसारी, मोहम्मद आसिफ, कुमैल अहमद, मोहम्मद अकरम, मोहम्मद अहमद, खिज्र हयात, जमीर अहमद, हकीम असलम, अरमान जहीर, मोहम्मद शाहान, मोहम्मद अहमद, शहरान सहित कई शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश किए। सभी शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राहत इंदौरी को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिस पर श्रोताओं ने खूब दाद दी।
कार्यक्रम के अंत में संयोजक कलीमुल्लाह अंसारी ने सभी अतिथियों, शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक विरासत को मजबूत करते हैं। इस अवसर पर अरकम, मारूफ, कमरुज्जमा, नईम, जावेद, मोहम्मद जफीर, मोहम्मद हस्सान, जहीर, शहाब, उमैर, शादाब सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। मुशायरा देर रात तक चला और पूरे क्षेत्र में साहित्यिक माहौल बना रहा।




