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भूमि विवाद में 151 का डंडा, विद्यालय में मौजूद शिक्षक पर भी हुई कार्रवाई से भड़का मामला

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पुलिस की कार्यवाही पर उठी उंगली

अंबेडकरनगर। बेवाना थाना क्षेत्र में भूमि विवाद से जुड़े मामले में धारा 151 के तहत की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अकबरपुर–दोस्तपुर मार्ग किनारे स्थित जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्षों के बीच चल रहे विवाद में पुलिस ने शांति भंग की आशंका के आधार पर कार्रवाई की, लेकिन सूची में एक शिक्षक का नाम शामिल होने पर हंगामा बढ़ गया।

शिक्षक का नाम आने से बढ़ा विवाद

स्थानीय लोगों के मुताबिक रामजी व लालजी पुत्र रामनाथ तथा दूसरे पक्ष के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी मामले में की गई कार्रवाई में सोमेंद्र वीर सिंह का नाम भी शामिल कर लिया गया।


बताया जा रहा है कि घटना के समय शिक्षक बेवाना खास स्थित विद्यालय में मौजूद होकर शिक्षण कार्य कर रहे थे। इसके बावजूद उनका नाम धारा 151 की सूची में दर्ज होने पर सवाल खड़े हो गए। ग्रामीणों व परिचितों का कहना है कि शिक्षक का विवाद से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था और उन्हें फर्जी तरीके से सूची में शामिल किया गया।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

मामले को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक तथ्यों की जांच किए बिना जल्दबाजी में नाम दर्ज कर दिए गए। इससे निर्दोष व्यक्ति की सामाजिक छवि प्रभावित हुई है और क्षेत्र में नाराजगी का माहौल बन गया है।

इस मामले में लेखपाल जसवंत और तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रभाकांत तिवारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन विवाद की निष्पक्ष जांच किए बिना कार्रवाई कर दी गई, जिससे विवाद और गहरा गया।

भूमि विवाद से शुरू हुआ मामला

जानकारी के अनुसार अकबरपुर–दोस्तपुर मार्ग किनारे स्थित जमीन पर निर्माण और कब्जे को लेकर तनाव की स्थिति बनी थी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शांति भंग की आशंका में धारा 151 के तहत कार्रवाई की। इसी कार्रवाई में कुछ ऐसे नाम भी शामिल हो गए, जिनका विवाद से प्रत्यक्ष संबंध नहीं बताया जा रहा है।

पुलिस कार्रवाई के बाद संबंधित लोगों को न्यायालय में पेश किया गया। इसी दौरान सूची में शिक्षक का नाम शामिल होने पर आपत्ति जताई गई। स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए कथित रूप से लेन-देन हुआ, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और लोग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

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