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ऑनलाइन हम्दिया मुशायरा की गोल्डन जुबली पर शायरों ने दिखाया अपना ज़ौहर

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अम्बेडकरनगर: बज़्म अरमुगान-ए-अदब के तत्वाधान में मिसरा तरह (पंक्ति) पर आधारित 50 वां ऑनलाइन हमदिया मुशायरा की गोल्डन जुबली शुक्रवार की रात 09 बजे खालिद आजम के संरक्षण तथा सितारे उर्दू अवार्ड से सम्मानित मो. शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान की अध्यक्षता तथा तारिक मुस्तफा के संचालन में मनाई गई।

मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि उर्दू शायरी हिंदुस्तानी तहज़ीब का आईना है। उर्दू जुबान में हम्द की विधा बहुत मकबूल है जिसमें शायर खुदा की तारीफ बयान करता है।खालिद आजम ने कहा कि उर्दू में जिंदगी के सभी रंग मौजूद हैं। संयोजक अशहर हमीदी ने कहा कि उर्दू जुबान की मिठास से उसकी खास अहमियत है। मुशायरे में शायर खालिद आजम टांडवी ने शेर पढ़ा कि गर हक के रास्ते का खालिद है तू मुसाफिर सच्ची खबर सुनाऊं जन्नत मकां है तेरा। अशहर हमीदी ने कहा मिलता है रिज़्क सबको बंदा कोई कहीं हो, हम सब की जिंदगी पर लुत्फे निहां है तेरा। जफर फैजाबादी ने कहा हम खाक के बने हैं फिर खाक में मिलेंगे, इस मौत व जिंदगी में सोदो जियां है तेरा। किस्मत सिकंदरपुरी ने कहा तेरी इनायतों की हद ही नहीं है कोई, जो ढांप ले सभी को वह साएबां है तेरा। अतहर कमलापुरी ने कहा चीन ओ अरब हैं तेरे हिंदुस्तान है तेरा, हर बाग पर नशेमन हर गुलसितां है तेरा।
इसके अलावा शाकिर सुल्तानपुरी, तौफीक फाखरी मुम्बई, डॉ.काजिम रजा शहनामऊ, रौनक सुल्तानपुरी, दिलशाद सिकंदरपुरी, जहीर हसन अकबरपुरी, तारिक मुस्तफा इल्तिफातगंजवी, इकबाल अकरम वारसी,अहमद सिकंदरपुरी, नूर सुल्तानपुरी, असलम सिकंदरपुरी व अन्य शायरों ने अपने कलाम पेश किए।

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