बलिया (रिपोर्ट अखिलेश सैनी) विगत में वर्षों पूर्व 1960 के दशक में रसड़़ा में कार्यरत मुंसिफ न्यायालय को तत्कालीन प्रशासन द्वारा बलिया स्थानांतरित कर दिया गया था जो, अब तक पुनः रसड़़ा वापस नहीं आ सका है। इस संम्बंध में संयुक्त व्यापार समिति और अधिवक्ता संघ के संयुक्त तत्वावधान में “मुंसिफ न्यायालय पुनर्स्थापना समिति रसड़़ा” के बैनर तले एक साथ मिलकर आंदोलन भी किया गया था। गत वर्ष 13 फरवरी 2021 को संयुक्त व्यापार समिति ने पुनः मा. उच्चन्यायालय इलाहाबाद हाईकोर्ट, मा. मुख्यमंत्री उ०प्र० सरकार, विधि एवं न्याय मंत्री उ०प्र० सरकार सहित जनपद न्यायाधीश बलिया के साथ ही क्षेत्रीय विधायक मा. उमाशंकर सिंह को पत्रक प्रेषित कर मुंसिफ न्यायालय के पुनर्स्थापना की मांग की गयी थी।
इस संबंध में समिति की आवश्यक बैठक बृहस्पतिवार की शाम स्टेशन रोड स्थित कार्यालय पर हुई। अध्यक्ष मोहम्मद युनूस की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक में मुंसिफ न्यायालय की पुनर्स्थापना हेतु अधिवक्ता संघ रसड़़ा के साथ सहयोग करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके साथ ही मुंसिफ न्यायालय को पुनः रसड़़ा में पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया को बाधित करने के उद्देश्य से बलिया के अधिवक्ताओं द्वारा किये जा रहे आन्दोलन को गलत करार दिया गया।
पूर्व अध्यक्ष सुरेश चन्द ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रदेश के तहसीलों में न्यायालय की स्थापना की प्रक्रिया चल रही है। उसी क्रम में रसड़़ा में मुंसिफ न्यायालय की स्थापना होनी है। महामंत्री विनोद शर्मा ने कहा कि मुंसिफ न्यायालय की स्थापना से वादकारियों को सस्ता व सुलभ न्याय मिलना सुनिश्चित होगा। बैठक में दीनदयाल शर्मा, गोपाल जी, दुर्गेश कुमार, शौकत अली, जमशेद आलम, अखिलेश सैनी, प्रदुमन जी, अनिल कुमार आदि उपस्थित रहे। संचालन मुख्तार अहमद ने किया।
मुंसिफ न्यायालय पुनर्स्थापना समिति को मिली सफलता लेकिन–


