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शासन तक गूंजी डॉ. हरिओम पांडेय की आवाज़, सिसवा को मिली 23 करोड़ की शिक्षा सौगात

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अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त पत्रकार) कद्दावर राजनीतिज्ञ व सत्ता के करीबी माने जाने वाले एमएलसी डॉ. हरिओम पांडेय की दमदार आवाज़ ने सिसवा की तस्वीर और तक़दीर दोनों बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा किया है। डॉ हरिओम पांडेय की प्रभावी पैरवी और मजबूत सियासी पकड़ का ही नतीजा है कि अकबरपुर विधानसभा क्षेत्र के सिसवा गांव को 23 करोड़ 23 लाख 58 हजार रुपये की ऐतिहासिक शिक्षा सौगात मिली है। यहां मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के निर्माण को न सिर्फ मंजूरी मिली, बल्कि पहली किश्त भी जारी कर दी गई है।

डॉ. हरिओम पांडेय के प्रस्ताव पर स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शासन से प्रशासनिक और वित्तीय हरी झंडी मिलते ही 11 करोड़ 61 लाख 79 हजार रुपये की पहली किश्त कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन को भेज दी गई। इससे साफ है कि शासन स्तर पर डॉ. पांडेय की बात को कितनी गंभीरता से सुना और माना गया।

यह मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय अंबेडकरनगर जिले का दूसरा ऐसा विद्यालय होगा। इससे पहले कटेहरी विधानसभा क्षेत्र के नरहरपुर में मॉडल स्कूल की सौगात भी डॉ. हरिओम पांडेय के प्रयासों से ही जिले को मिली थी। लगातार दूसरी बड़ी शैक्षिक उपलब्धि ने जिले की राजनीति और विकास दोनों में उनकी मजबूत पकड़ को एक बार फिर साबित कर दिया है।

प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप इस विद्यालय में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई एक ही परिसर में होगी। अकबरपुर तहसील के सिसवा गांव में इसके लिए लगभग 10 एकड़ भूमि चिह्नित की जा चुकी है। जानकारों का मानना है कि यह सब बिना डॉ. हरिओम पांडेय की सक्रिय भूमिका और शासन तक सीधी पहुंच के संभव नहीं था।
चर्चा है कि डॉ. हरिओम पांडेय केवल सिफारिश तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने इस क्षेत्र को शिक्षा का केंद्र बनाने का विज़न शासन के सामने मजबूती से रखा। इसी विज़न का परिणाम है कि सिसवा, रामपुर और सकरवारी जैसे क्षेत्रों को विश्वस्तरीय शैक्षणिक सुविधाओं से जोड़ने की योजना जमीन पर उतरने जा रही है।

विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और समग्र व्यक्तित्व निर्माण की सुविधाएं मिलेंगी। खासतौर पर दलित, पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष फोकस रहेगा, जो डॉ. हरिओम पांडेय की सामाजिक सोच और राजनीतिक प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है।

विद्यालय परिसर में मुख्य भवन (जी+2), मिड-डे मील भवन (जी+1), प्रधानाचार्य व उप प्रधानाचार्य आवास, कर्मचारी आवास, डॉरमेट्री, बाल वाटिका, मल्टीपर्पज हॉल, गार्ड रूम, बाउंड्रीवॉल, इंटरलॉकिंग और सीसी रोड का निर्माण होगा। यहां 1,500 छात्रों के बैठने और पढ़ने की व्यवस्था होगी और इसके लिए 30 से अधिक आधुनिक कक्षा-कक्ष बनाए जाएंगे।
बहरहाल मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय योजना के तहत प्रदेश के 75 जिलों में स्कूल खोले जाने हैं, लेकिन सिसवा को यह सौगात डॉ. हरिओम पांडेय की सियासी ताकत, शासन में मजबूत पकड़ और लगातार पैरवी के कारण मिली। स्थानीय लोगों में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह है और आम राय यही है कि डॉ. पांडेय ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनकी आवाज़ सिर्फ सुनी ही नहीं जाती, बल्कि फैसलों में बदली जाती है।

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