अम्बेडकरनगर: तहसील क्षेत्र के ग्राम सुरहुरपुर में मछली पालन के तालाब को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गांव की एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसके बीमार पति को धोखे में रखकर तालाब का पट्टा निरस्त करा दिया गया और मोटी रकम में दूसरे के नाम करा लिया गया। पीड़िता ने जिलाधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम सुरहुरपुर निवासी कुसुम गौड़ पत्नी मंगरु गौड़ के अनुसार, ग्राम सभा के तालाब में मछली पालन के लिए 20 वर्षों का पट्टा उनके पति के नाम आवंटित था। 3 जनवरी 2026 को उन्होंने लगभग एक लाख रुपये की लागत से तालाब में मछलियों का बीज भी डाला था। इसी दौरान उनके पति की अचानक तबीयत खराब हो गई और वे पट्टे का समय पर नवीनीकरण नहीं करा सके।
पीड़िता का आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए गांव के ही अवधेश गौड़ ने कथित रूप से उनके बीमार पति को शराब पिलाकर पट्टा न लेने का प्रार्थना पत्र लिखवा लिया। इसके बाद लगभग 2.70 लाख रुपये में तालाब का पट्टा अपने नाम करा लिया गया।
कुसुम गौड़ का कहना है कि तालाब में डाले गए मछली बीज व अन्य खर्च मिलाकर करीब ढाई लाख रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कूटरचना कर पहले पट्टा निरस्त कराया गया और फिर दूसरे के नाम जारी कर दिया गया।
पीड़िता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि कथित धोखाधड़ी से जारी पट्टा तत्काल निरस्त कर पुनः उसके पति के नाम बहाल किया जाए। उनका कहना है कि पूरा परिवार मछली पालन पर निर्भर है और यही आजीविका का एकमात्र साधन है।
मामले को लेकर गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म है, अब सबकी निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।




