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जिस जलती झोपड़ी से किताब बचाकर निकली थी मासूम अनन्या, पुनः उसी पर चला बुलडोज़र — अब बनेगा चिल्ड्रन पार्क

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अम्बेडकरनगर: जलालपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा अरई में 21 मई 2025 को बुलडोज़र की कार्रवाई के दौरान जलती झोपड़ी से अपनी कॉपी-किताबें सीने से लगाकर बाहर निकलती मासूम अनन्या की तस्वीर ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। वही झोपड़ी अब दोबारा प्रशासनिक कार्रवाई की जद में आ गई। रविवार को भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में प्रशासन ने बहुचर्चित सरकारी भूमि पर बने छप्परनुमा मकान को बुलडोज़र से ध्वस्त कर दिया। कब्जा हटाने के तुरंत बाद उसी जमीन पर चिल्ड्रन पार्क निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू करा दी गई, जिससे कार्रवाई ने नया मोड़ ले लिया।

बताया जाता है कि ग्राम सभा अरई स्थित गाटा संख्या 888/0.006 राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है। आरोप है कि राममिलन यादव परिवार सहित लंबे समय से इस भूमि पर छप्पर डालकर रह रहे थे। राजस्व विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार न्यायालय में बेदखली की कार्यवाही शुरू कराई थी। इससे पहले कब्जा हटाने के प्रयास के दौरान छप्पर में आग लग गई थी और मासूम अनन्या के किताब बचाकर बाहर निकलने का वीडियो वायरल हो गया था। तस्वीर ने संवेदनाएं जगाईं, राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हुई और प्रशासन को उस समय कार्रवाई अधूरी छोड़नी पड़ी थी।

इसके बाद प्रतिवादी पक्ष ने राहत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन याचिका खारिज हो गई। न्यायालय से राहत न मिलने के बाद तहसीलदार न्यायालय ने बेदखली का आदेश पारित कर दिया। इसी आदेश के अनुपालन में 29 मार्च को तहसीलदार निखिलेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम दो बटालियन पीएसी और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई शुरू होने से पहले ही परिवार के एक महिला और एक पुरुष सदस्य को हिरासत में लिया गया। इसके बाद छप्पर में रखा सामान बाहर निकलवाकर जेसीबी से निर्माण ध्वस्त कर जमीन को समतल करा दिया गया।

प्रशासन ने दोबारा अतिक्रमण की आशंका को देखते हुए कब्जामुक्त भूमि पर तत्काल चिल्ड्रन पार्क निर्माण का काम भी शुरू करा दिया। हालांकि कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का कहना है कि जिस झोपड़ी से किताब बचाती मासूम की तस्वीर ने कभी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे, उसी जगह पर अब बुलडोज़र चलने से मानवीय पहलू फिर बहस के केंद्र में आ गया है। वहीं प्रशासन इसे न्यायालय के आदेश का अनुपालन बताते हुए नियमित कार्रवाई बता रहा है, लेकिन जमीन पर चली कार्रवाई ने पुराने विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

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