अम्बेडकरनगर: जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने हीतवेव (लू) से बचाव के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिया है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व डकटर सदानन्द गुप्ता ने बताया कि वर्तमान समय में पारा 43 डिग्री सेल्यिस से अधिक होने के कारण भीषण गर्मी, गर्म हवा व लू के प्रकोप से बचाव हेतु संबंधित विभागों को जिलाधिकारी अविनाश सिंह द्वारा निर्देश दिये गये है कि जनसामान्य लू से बचाव को लेकर बताये उपायों को अमल में लायें और अपना बचाव करें। अपर जिलाधिकारी डॉ सदानंद गुप्ता ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार 31 मई 2024 एवं 2 जून 2024 तक हीट वेव चलने की संभावना है। ऐसे में हीटवेब (लू) से बचाव के लिए आवश्यक एहतियात बरती जायें तथा सुरक्षात्मक उपायों को अपनाया जाये। जिससें भीषण गर्मी, गर्म हवा व लू से अपना बचाव कैसे करें तथा सुरक्षित कैसे रहें। गर्म हवाओं से बचने के लिए खिड़की को रिफ्लेक्टर जैसे एलुमिनियम पन्नी, गत्ते इत्यादि से ढककर रखें, ताकि बाहर की गर्मी को अन्दर आने से रोका जा सके। उन खिड़कियों व दरवाजों पर जिनसे दोपहर के समय गर्म हवाएं आतीं हैं, काले परदे लगाकर रखना चाहिए। आपदा विशेषज्ञ श्री सूर्यमान ने बचाव के तरीके बताते हुए कहा कि गर्मी हवाओं से बचने के लिए स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान को सुनें और आगामी तापमान में होने वाले परिवर्तन के प्रति सजग रहें। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण ले। बच्चों तथा पालतू जानवरों को कभी भी बन्द वाहन में अकेला न छोड़ें। जहां तक सम्भव हो घर में ही रहें तथा सूर्य के ताप से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर रहें। संतुलित, हल्का व नियमित भोजन करें और बासी खाने का प्रयोग कदापि न करे और मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें। घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी, छांछ, मट्टा, बेल का शर्वत, नमक चीनी का घोल, नीबू पानी या आम का पना इत्यादि का प्रयोग करें।
जानिए कब लगती है लू
गर्मी में शरीर के द्रव्य बॉडी पल्यूड सूखने लगते हैं। शरीर में पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुरानी बीमारी, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह वाले व्यक्तियों को लू से विशेष बचाव करने की जरूरत है। इसके अलावा डॉययूरेटिक, एंटीस्टिमिनक, मानसिक रोग की औषधि का उपयोग करने वाले व्यक्ति भी लू से सवाधान रहें।
लू लगने के लक्षण
गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना, तेज पल्स होना, उल्टे श्वास गति में तेजी, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति,सिरदर्द, मिचली, थकान और कमजोरी का होना या चक्कर आना, मूत्र न होना अथवा इसमें कमी आदि मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों के चलते मनुष्यों के शरीर के उच्च तापमान से आंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। इससे शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न हो जाता है।
जनपद में हीटवेव (लू) के प्रति जोखिम (कमजोर वर्ग एवं क्षेत्र की पहचान)
◆05 वर्ष से कम आयु के बच्चे व 65 वर्ष से ज्यादा के व्यक्ति एवं गर्भवती महिलायें।
◆ऐसे व्यक्ति जोकी सैन्य, कृषि, निर्माण और औद्योगिक व्यवसाय में श्रमिक, मजदूर, खिलाड़ी आदि हों।
◆ पर्यावरण बदलने के कारण गर्मी के अनुकूलनता का आभाव।
आपदा संबंधी सहायता के लिए निम्न नम्बरो पर सम्पर्क कर सकते है।
◆ एम्बुलेंस 108, पुलिस -112, राहत आयुक्त कार्यालय 1070 टोलफ्री
गर्म हवाएं/लू की स्थिति में क्या करें और क्या न करें
इस दौरान क्या करें
रेडियो सुनिए, टीवी देखिए, स्थानीय मौसम समाचार के लिए समाचार पत्र पढ़ें।
खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), लस्सी, (चावल का पानी), नींबू का पानी, छाछ आदि
जैसे घरेलू पेय का इस्तेमाल करें। हल्के वजन, हल्के रंग के, ढीले, सूती कपडे पहनें एवं अपना सिर ढंकेंः कपड़े, टोपी या छतरी का उपयोग करें।
अधिक से अधिक पानी पियें एवं हांथों-पैर को पानी से बार-बार घोएं।
नियोक्ता और श्रमिक क्या करें
अनावश्यक घर से बाहर प्रात 11 से सांयकाल 04 बजे तक न निकले बहुत ही आवश्यक होने पर चेहरे व सिर को ढककर ही निकले।
कार्य स्थल के पास ठंडा पेयजल उपलब्ध कराएं।
कार्यकर्ताओं को सीधे धूप से बचने को कहे।
अति पारिश्रमिक वाले कार्यों को दिन के ठन्डे समय मे निर्धारित करें। बाहरी गतिविधियों के लिए ब्रेक की आवृत्ति में वृद्धि करें।
गर्भवती और श्रमिकों जिन्हें चिकित्सा देख-भाल की अचानक जरुरत हो सकते हो उनका अतिरिक्त ध्यान दिया जाना चाहिए।वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों के लिये निर्देश
तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों, तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांब करें।ध्यान रहे कि उनके पास फोन हो।यदि वे गर्मी से बैचेनी महसूस कर रहे हों तो उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें।उनके शरीर को गीला रखें, उन्हें नहलाएं अथवा उनकी गर्दन तथा बगलों में गीला तौलिया रखें।
उन्हें अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखने के लिए कहें।
शिशुओं के लिये निर्देश
उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं।
शिशुओं में गर्मी की वजह से होने वाली बीमारियों का पता लगाना सीखें।
यदि बच्चों के पेशाब का रंग गहरा है तो इसका मतलब है कि यह डिहाईड्रेशन (पानी की कमी) का शिकार हैं। बच्चों को बिना देखरेख खड़ी गाड़ी में छोड़ कर न जाएं, वाहन जल्दी गर्म होकर खतरनाक तापमान पैदा कर सकते हैं।
पशुओं के लिए क्या करें
जहां तक संभव हो, तेज गर्मी के दौरान उन्हें घर के भीतर रखें।
यदि उन्हें घर के भीतर रखा जाना संभव न हो तो उन्हें किसी छायादार स्थान में रखें, जहां वे आराम कर सकें। ध्यान रखें कि जहां उन्हें रखा गया हो वहां दिनभर छाया रहें। जानवरों को किसी बंद में न रखें, क्योंकि गर्म मौसम में इन्हें जल्दी गर्मी लगने लगती है। ध्यान रखें कि आपके जानवर पूरी तरह साफ हों, उन्हें ताजा पीने का पानी दें, पानी को धूप में न रखें। दिन के समय उनके पानी में बर्फ के टुकड़े डालें। पीने के पानी के दो बोतल रखें ताकि एक में पानी खत्म होने पर दूसरे से वे पानी पी सकें।किसी भी स्थिति में जानवर को वाहन में न छोडे एवं अपने पालतू जानवर का खाना धूप में न रखें।
सभी के लिए अन्य सावधानियाँ
जितना हो सके घर के अंदर रहें।अपने घर को ठंडा रखें। पर्दे, शटर या धूप का उपयोग करें और खिड़कियां खुली रखें।निचली मंजिलों पर रहने का प्रयास करें।पंखे का प्रयोग करें, कपड़ों को नम करें और ठंडे पानी में स्नान करें। यदि आप बेहोश या कमजोरी महसूस करते हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाए।जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पीने के लिए भरपूर पानी दें।




