अम्बेडकरनगर: प्रत्येक मनुष्य को इल्म (शिक्षा) प्राप्त करना अनिवार्य है लेकिन बिना अदब (संस्कार) के शिक्षा ज्ञान सब अधूरा है बल्कि शून्य है।
उक्त बातें कारी जमाल अशरफ निजामी ने जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी हरमैन शरीफैन कार्यक्रम की निजामत (संचालन) करते हुए कहा। टाण्डा नगर क्षेत्र के मोहल्लाह सकरावल पूर्व में संचालित मकतब फैजाने हक़्क़ानी के मुख्य शिक्षक हाफिज व कारी कमाल अहमद के उमरा शरीफ (दर्शन मक्का मदीना) पर जाने से पूर्व मदरसा फैजाने हक़्क़ानी में नातिया कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसकी अध्यक्षता हाफिज मो.हामिद व संचालन कारी जमाल अशरफ निजामी द्वारा किया गया। उक्त कार्यक्रम में मौलाना इबरार अहमद बस्तवी द्वारा सफर उमरा पर विस्तार से रौशनी डाली गई और सफर के दौरान कई महत्वपूर्ण बातों की नसीहत भी की गई।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे कारी जमाल अशरफ निजामी ने शिक्षा व अदब पर काफी गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मकसद सिर्फ़ ज्ञान हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चे के संपूर्ण विकास पर ध्यान देना चाहिए और शिक्षक व अभिभावक होने के नाते हमारा दायित्व है कि हम बच्चों में नैतिक मूल्यों के साथ साथ उनमें संस्कार की भी वृद्धि करें क्योंकि बिना संस्कार (अदब) के ग्रहण की गई शिक्षा का मूल्य शून्य होता है जिससे शिक्षा व्यर्थ चली जाती है। उक्त अवसर पर हेलाल टाण्डवी, मुदस्सिर रज़ा, अकमल रज़ा, शाहिद सादानी, असलम टाण्डवी, कफील अशरफ आदि शायरों ने अपने अपने अनोखे अंदाज में नात पाक का नज़राना पेश किया। कार्यक्रम के अंत में उमरा मुबारक के सफर पर जाने वाले हाफिज व कारी कमाल अहमद ने सभी से जाने अनजाने में हुई गलतियों की माफी मांगी तथा दुआ के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ।




