पुलिस की खामोशी पर उठने लगा है सवाल !
अम्बेडकरनगर जनपद के आलापुर क्षेत्र के ढोल बजवा बाजार में मंगलवार की शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब खुद को लखनऊ से आया ड्रग इंस्पेक्टर बताने वाला एक युवक मेडिकल स्टोर पर छापेमारी करने जा पहुंचा। मामला अकबरपुर से जुड़ा होने के कारण पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
ढोल बजवा बाजार स्थित राज मेडिकल स्टोर के संचालक विशाल के मुताबिक, शाम करीब 5:30 बजे बिना नंबर प्लेट की बाइक पर सवार दो युवक दुकान पर पहुंचे। उनमें से एक ने रौब झाड़ते हुए खुद को लखनऊ से आया ड्रग इंस्पेक्टर बताया। पहले उसने प्रतिबंधित नशीली दवाओं की मांग की, फिर मुख्यमंत्री के “विशेष आदेश” का हवाला देते हुए लाइसेंस और कैश मेमो की जांच की बात कहकर दबाव बनाने लगा।
दुकानदार को जब उसकी गतिविधियों पर शक हुआ तो उसने तत्काल अकबरपुर स्थित असली ड्रग इंस्पेक्टर को फोन मिला दिया। वहां से साफ कर दिया गया कि विभाग की ओर से कोई टीम नहीं भेजी गई है। इतना सुनते ही कथित इंस्पेक्टर के चेहरे का रंग उड़ गया और दोनों मौके से भागने लगे। लेकिन बाजार में मौजूद लोगों ने फुर्ती दिखाते हुए एक आरोपी को दबोच लिया, जबकि उसका साथी बाइक लेकर फरार हो गया। सूचना पर पहुंची यूपी-112 की टीम पकड़े गए युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
पीड़ित दुकानदार ने थाने में लिखित तहरीर देकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस घटना के बाद पूरे बाजार में दहशत और आक्रोश का माहौल है। दुकानदारों का कहना है कि यदि समय रहते सतर्कता न बरती जाती तो बड़ी ठगी हो सकती थी।
हालांकि, हैरानी की बात यह है कि घटना के 24 घंटे बाद भी पुलिस ने न तो मुकदमा दर्ज किया है और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है। आलापुर थाना प्रभारी का कहना है कि “जांच की जा रही है”, लेकिन अब तक न कोई एफआईआर दर्ज हुई है और न ही आधिकारिक बयान जारी किया गया है।
बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस की सुस्ती जालसाजों के हौसले बुलंद कर रही है? और अगर असली ड्रग इंस्पेक्टर का नाम लेकर खुलेआम बाजार में वसूली की कोशिश हो सकती है, तो आम दुकानदार कितने सुरक्षित हैं?
फिलहाल क्षेत्र में चर्चा यही है— “अगर दुकानदार ने सूझबूझ न दिखाई होती, तो फर्जी इंस्पेक्टर का खेल चल निकलता!”





