“दरगाह मखदूम अशरफ से जुड़ी संपत्ति वक्फ नहीं बल्कि मखदूम अशरफ के वंशजों की व्यक्तिगत संपत्ति”
अम्बेडकरनगर: आध्यात्मिक इलाज़ के लिए विश्व पटल पर लोहा मनवाने वाली प्रख्यात दरगाह किछौछा में खानवादे अशरफिया के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है। दरगाह की प्रॉपर्टी व रखरखाव को लेकर अकसर विवाद सामने आ जाता है। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शैलेश कुमार मौर्य की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पीरजादागान इन्तेज़ामिया कमेटी को जहां बड़ी राहत प्रदान किया है वहीं सज्जादानशीन सैय्यद मोहिउद्दीन अशरफ को बड़ा झटका लगा है।
बताते चलेंकि प्रसिद्ध सूफी सुल्तान सैय्यद जहांगीर अशरफ सिमनानी की दरगाह किछौछा शरीफ के सज्जादानशीन सैय्यद शाह मोहिउद्दीन अशरफ द्वारा सैय्यद खलीक अशरफ आदि के खिलाफ मूल वाद संख्या 82/2019 जिसमें सैय्यद मोहिउद्दीन अशरफ ने दरगाह की संपत्ति पर सज्जादानशीन के एकाधिकार बनाये रखने एवं दरगाह के रखरखाव में पीरजादगान के अनावश्यक हस्तक्षेप ना करने की अपील किया था।
सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने स्पष्ट भी किया कि सैय्यद मखदूम अशरफ सिमनानी की तमाम प्रापर्टी वक्फ नहीं है बल्कि शाह मखदूम अशरफ के वंशजों की प्रॉपर्टी है। अदालत ने पीरजादगान इन्तेज़ामिया कमेटी को दरगाह को चन्दा अथवा स्वैछिक दान लेने व दरगाह की साफ सफाई व व्यवस्था करने को न्यायोचित माना हालांकि सभी का लेखा जोखा रखने का भी निर्देश दिया है। उक्त आदेश से पीरजादगानों में खुशी की लहर दौड़ गई है।




