अम्बेडकरनगर (मान्यता प्राप्त पत्रकार आलम खान एडिटर की विशेष रिपोर्ट) जनपद की तहसील टाण्डा व थानाक्षेत्र में बसखारी के रसूलपुर में स्थित सूफी संत हज़रत सैय्यद शाह सुल्तान मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी की दरगाह रूहानी इलाज़ का विश्व स्तरीय केंद्र माना जाता है।
दरगाह किछौछा में पूरे विश्व से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला वर्ष भर जारी रहता है। यूं तो दरगाह पर आए श्रद्धालुओं को चारों तरफ शांति ही शांति नज़र आती है लेकिन वास्तविकता ये है कि दरगाह किछौछा को लेकर दरगाह, बसखारी व किछौछा में बड़ी गहरी राजनीति चली आ रही है तथा हज़रत मखदूम अशरफ के वंशज में ही अंदर अंदर काफी टकराव की स्थिति रहती है।
इतिहास गवाह है कि दरगाह आस्ताना पर मठाधीशी (गद्दी) को लेकर पूर्व में काफी बवाल हो चुका है। मौजूदा समय में सब कुछ शांत तो दिखाई दे रहा है लेकिन कब क्या हो जाये ये कोई नहीं बता सकता है।
हज़रत मखदूम अशरफ सिमनानी के वंशज एवं दरगाह किछौछा आस्ताना के सज्जादानशीन व मोतवल्ली मौलाना सैय्यद शाह मोहिउद्दीन अशरफ का निकाह सोमवार की रात्रि में मखदूम अशरफ के ही वंशज व सरपरस्त सज्जादानशीन अल्लामा मौलाना सैय्यद शाह फखरुद्दीन अशरफ उर्फ फखर मियां की बेटी से हुआ।
श्री फखरुद्दीन अशरफ श्री मोहिउद्दीन अशरफ के सगे चाचा हैं लेकिन दरगाह गद्दी को लेकर दोनों। पक्ष में काफी दिनों से टकराव चल रहा था और सुलह समझौता के आधार पर वार्षिक उर्स के दौरान 27 मोहर्रम पर सैय्यद मोहिउद्दीन अशरफ द्वारा हज़रत मखदूम अशरफ का प्राचीन ऐतिहासिक वस्त्र धारण कर रस्म अदायगी की जाती है जबकि 28 मोहर्रम पर सैय्यद फखरुद्दीन अशरफ द्वारा वही प्राचीन वस्त्र धारण कर रस्म अदायगी की जाती है।
चाचा भतीजे के बीच बढ़ी दूरियों का काफी लोगों द्वारा फायदा भी उठाया जाता रहा है लेकिन अब चाचा की बेटी का निकाह भतीजे के साथ होने पर पारिवारिक दूरियां तो समाप्त हुईं ही बल्कि दरगाह गद्दी को लेकर बढ़ी दूरियां भी समाप्त मानी जाने लगी हैं।
सोमवार रात्रि में हुए उक्त निकाह के गवाह जनपद ही नहीं बल्कि काफी दूर दराज से आये संभ्रान्त लोग बने तथा बधाइयाँ भी दिया।
चर्चा है कि उर्स के दौरान 27 व 28 मोहर्रम के दिन दोनों पक्षों का अलग अलग ग्रुप होता था लेकिन अब इस नए रिश्ते से दोनों पक्ष एक हो गया जो आने वाले समय में दरगाह की शांति व तरक्की के लिए मील का पत्थर साबित होगा।


