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कानून की पढ़ाई में कानून बेबस! केस में फंसा परीक्षा केंद्र लेकिन 75 हजार पर अब भी चुप्पी

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बीएनकेबी पीजी कालेज में सीबीसिंह लॉ कालेज, ठाकुर दीप नारायण सिंह स्मारक लॉ कालेज, शिवम कालेज आफ लॉ. एस एस बी सिंह लॉ कालेज, राम अवध स्मारक लॉ कालेज, फूला देवी चन्द्रधर मिश्रा लॉ कालेज के कुल 1663 छात्रों की थी परीक्षा

सीबीसिंह लॉ कालेज के ज़िम्मेदार के खाते में छात्रों द्वारा मोटी रकम भेजे जाने के मामले में सवाल बाकी! कद्दावर भाजपा नेता से जुड़ा मामला–

जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के निर्देश पर आकस्मिक निरीक्षण के दौरान मिली बड़ी अव्यवस्था

एलएलबी परीक्षा केंद्र में अव्यवस्था का बोलबाला, औचक निरीक्षण में खुली पोल, नायब तहसीलदार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज, केंद्राध्यक्ष डॉ. सुचिता पांडेय सहित दो नामजद, एक अज्ञात आरोपी

अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त) विधि परीक्षा केंद्र बीएकेबी पीजी कॉलेज अकबरपुर पर औचक निरीक्षण के दौरान सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ नायब तहसीलदार अकबरपुर ने सख्त रुख अपनाते हुए थाना अकबरपुर में मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले में केंद्राध्यक्ष डॉ. सुचिता पांडेय सहित दो नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है लेकिन सीबीसिंह लॉ कालेज के ज़िम्मेदार के खाते में 75 हजार रुपये के वायरल स्क्रीनशॉट का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में नज़र आ रहा है। चर्चा है कि 75 हज़ार की मोटी रकम लेकर छात्रों को बिना पढाई लिखाई के वकील बनवाने की गारंटी लेने वाला सत्ता पक्ष का कद्दावर नेता है जिसके कारण ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी है और न ही परीक्षा ही निरस्त की गई है।

एसडीएम अकबरपुर व नायब तहसीलदार के संयुक्त निरीक्षण के दौरान परीक्षा केंद्र में सीसीटीवी कैमरों के निष्क्रिय/फोटोकॉपी लगे होने, सीटिंग प्लान के उल्लंघन, छात्रों को आमने-सामने बैठाकर परीक्षा कराए जाने, तथा कक्षा निरीक्षकों की अपूर्ण और संदिग्ध तैनाती जैसी गंभीर खामियां उजागर हुईं। निरीक्षण टीम के अनुसार कई कक्षों में न तो मानक व्यवस्था थी और न ही परीक्षार्थियों की निगरानी का कोई ठोस इंतजाम था।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि कक्षा निरीक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और पद से संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं पाए गए, जबकि ड्यूटी रजिस्टर में दर्ज नामों का सत्यापन भी संदिग्ध निकला। पूछताछ में कुछ निरीक्षकों द्वारा स्वयं को विधि शिक्षक या छात्र बताने जैसे विरोधाभासी बयान सामने आए, जिससे पूरे केंद्र प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए।

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि केंद्र पर तैनात निरीक्षक परीक्षा के समय अनुपस्थित पाए गए, वहीं कुछ गैलरियों में बिना निगरानी परीक्षार्थी बैठे मिले। अभिलेखों में हेरफेर, तिथियों में विरोधाभास और कॉलेजों से निरीक्षकों की तैनाती का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड न होना भी जांच का अहम बिंदु बना।

नायब तहसीलदार देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव की तहरीर पर अकबरपुर पुलिस ने मुकदमा संख्या 97/26 पर बीएनएस की धारा 319(2), 318(4) व आईटी एक्ट की धारा 65 एवं यूपी सार्वजनिक परीक्षा निवारण की धारा 11 के तहत बीएनकेबी पीजी कॉलेज में विधि परीक्षा की केंद्राध्यक्ष डॉ. सुचिता पांडेय सहित सीपी तिवारी, अजय सिंह व एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न सिर्फ परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे लापरवाही और मिलीभगत से भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हैं। आधा दर्जन विद्यालयों के 1600 से अधिक छात्रों के विधि परीक्षा केंद्र पर भारी अनियमितता के खिलाफ तो मुकदमा दर्ज हो गया लेकिन क्या परीक्षा निरस्त कर पुनः व्यवस्थित ढंग से परीक्षा कराई जानी चाहिए और क्या मोटी रकम के बदले परीक्षार्थियों की नैया पार कराने वालों पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए, ये सवाल फिलहाल ठंडे बस्ते में नज़र आ रहा है।

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