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बिडहर लूटकांड: सवालों के घेरे में ‘खुलासा’, पीड़ित के भाई पर साजिश का ठीकरा? थाने में पूछताछ या रात में लिखी गई कहानी?

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अम्बेडकरनगर: बिडहर लूटकांड अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। खुलासे के बाद जिस तरह पीड़ित के करीबी को ही “मास्टरमाइंड” बताया गया, उससे पूरे मामले ने नया और विवादित मोड़ ले लिया है।

पीड़ित जलाल के बड़े भाई अकबाल का आरोप है कि रविवार को जलाल और शाहिद को थाना जहाँगीरगंज “सिर्फ पूछताछ” के लिए बुलाया गया था। कुछ ही घंटों में जलाल को छोड़ दिया गया, जबकि शाहिद को रातभर थाने में रखा गया। परिजनों का कहना है कि इसके बाद अचानक शाहिद को लूटकांड का आरोपी बना दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह गहराता है।

वहीं, अपर पुलिस अधीक्षक श्याम देव ने मामले में पुलिस का पक्ष रखते हुए अलग तस्वीर पेश की है। उनके अनुसार, बिडहर पुल के पास कपड़ा व्यापारियों से 17 लाख नहीं, बल्कि 12 लाख 50 हजार रुपये की लूट हुई थी, जिसमें से 5 लाख 45 हजार रुपये बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस का दावा है कि पीड़ित जलाल का भाई शाहिद ही इस लूट की साजिश का मास्टरमाइंड है, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात की योजना बनाई। साथ ही, कुछ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी बताई जा रही है।

परिवार ने पुलिस की इस कार्रवाई को सिरे से खारिज करते हुए आरोप लगाया है कि असली अपराधियों तक पहुंचने के बजाय “आसान टारगेट” को फंसाया गया है। उनका कहना है कि जांच में निष्पक्षता की कमी दिख रही है और साक्ष्यों के नाम पर एकतरफा कार्रवाई की गई है।

मामले में कई अहम सवाल भी उठ रहे हैं। यदि पुलिस के पास पहले से ठोस सबूत थे, तो आरोपी की पहचान “पूछताछ” के बाद ही क्यों सामने आई? इसके अलावा, घटना स्थल के पास स्थित पुलिस चौकी पर ताला क्यों पड़ा था और वहां लगा सीसीटीवी कैमरा क्यों हटाया गया था—ये सवाल भी अब जांच के केंद्र में हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने थाने से लेकर अदालत तक बहस छेड़ दी है कि क्या गिरफ्तारी की प्रक्रिया पारदर्शी रही या फिर किसी दबाव में निर्णय लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, पीड़ित परिवार अब मामले को उच्च अधिकारियों या स्वतंत्र जांच एजेंसी तक ले जाने की तैयारी में है। यदि ऐसा होता है, तो बिडहर लूटकांड में “खुलासा बनाम आरोप” की यह टकराव और तीव्र हो सकता है।

फिलहाल, मामला दो स्पष्ट पक्षों में बंट चुका है—एक ओर पुलिस का दावा, दूसरी ओर परिवार के गंभीर आरोप। सच क्या है, यह आने वाली जांच ही तय करेगी, लेकिन इतना तय है कि इस मामले में अब हर कदम सवालों के घेरे में है।

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