अम्बेडकरनगर: हंसवर कस्बे के भूलेपुर बाजार में रविवार की रात अदबी और सांस्कृतिक माहौल उस समय खुशनुमा हो गया, जब “जश्न-ए-इस्तकबाले अहमद हाशिम मालेगांव” के नाम से ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मास्टर अबू साद, कुमैल सिद्दीकी और हकीम इरफान आज़मी की कन्वीनरशिप में हुआ।

कार्यक्रम की अगुवाई लीडर मुसाब अज़ीम ने की, जबकि डॉ. फिरोज अख्तर और चांदनी मुस्कान ने सरपरस्ती निभाई। महफिल की अध्यक्षता हाफिज महबूब आलम ने किया। मंच संचालन मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने बेहद शानदार अंदाज में किया, जिन्होंने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।
मुशायरे का आगाज मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख संजय सिंह ने शमा रोशन कर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ऐसे अदबी कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, भाईचारा और मोहब्बत को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि मुशायरा सिर्फ साहित्य की सेवा नहीं, बल्कि समाज में तहजीब और शाइस्तगी को भी मजबूत करता है। वहीं कुमैल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि उर्दू भाषा और मुशायरे हमारी साझा संस्कृति की पहचान हैं, जिन्हें जिंदा रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
मुशायरा कन्वीनर और कलीमुल्लाह अंसारी समेत कमेटी के सदस्यों ने मुख्य अतिथि व सभी शायरों की गुलपोशी कर शॉल ओढ़ाकर गर्मजोशी से स्वागत किया, जिससे महफिल की रौनक और बढ़ गई।
मुशायरे में देश के विभिन्न राज्यों से आए शायरों ने अपने चुनिंदा कलाम पेश किए। चांदनी मुस्कान ने पढ़ा—
“ख्वाब का आंखों में आना और जाना हो गया,
आप को देखा है जब से दिल दीवाना हो गया।”
फैयाज फैजी नेपाल ने कहा—
“वक्त मेरे जख्मों को क्या भर पाएगा,
जाने वाला लौट के वापस आएगा।”
अहमद हाशिम मालेगांव ने सुनाया—
“जन्नत को अपने नाम कराने के वास्ते,
मैं जा रहा हूं मां को सुनाने के वास्ते।”
रोशन हबीबा रोशन झारखंड ने देशभक्ति का रंग बिखेरा—
“मेरी पहचान, मेरी जान, मेरी शान है इससे,
कटे गर्दन मेरी लेकिन तिरंगा झुक नहीं सकता।”
इसके अलावा कुमैल अहमद डोंडवी, हकीम इरफान आज़मी सहित अन्य शायरों ने भी अपने शानदार अशआर से खूब दाद बटोरी।
मुशायरे में डॉ. हसन सईद जलालपुरी, अकरम भूलेपुरी, शाद अकबरपुरी, हलचल टांडवी, अहमद अयाज जलालपुरी, शगुफ्ता अंजुम लखनवी, हसन वारसी किछौछवी, साहिल मुबारकपुरी, सुमन खातून टांडवी, सोहराब जहांगीरगंजवी, एहतिशाम चियाकोट, अहमद सईद टांडवी, इंसाफ टांडवी, दिल सिकंदरपुरी, मतलूब टांडवी, मोहम्मद शाहान भोलेपुरी, राहत नवाज भूलेपुरी, ओल परवाना, रूमी, मोहम्मद असद और हाफिज अंस समेत कई शायरों ने शिरकत की।
मुशायरा देर रात तक चलता रहा और श्रोताओं ने अदब से सजी इस यादगार महफिल का भरपूर लुत्फ उठाया।








