सिविली न्यायालय के आदेश व अपर उप जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद गाटा संख्या 376 पर बने भवन को पुलिस व राजस्व टीम की मौजूदगी में दबंग भू माफियाओं ने बुल्डोजर चला कर किया ध्वस्त !
अम्बेडकरनगर: अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद एक भवन पर बुल्डोजर चलाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन कर दिया है। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी तथ्यों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट करे और तय समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि यदि जांच में आदेशों की अवहेलना या लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने कहा कि न्यायालय के आदेशों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उधर, इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने घटना पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे कानून व्यवस्था और न्यायपालिका की अवहेलना बताया। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश के बावजूद बुल्डोजर चलना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है और इससे आम जनता का भरोसा कमजोर होता है। अखिलेश यादव ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए।
बताते चलेंकि अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के अरिया पुलिस चौकी के निकट गाटा संख्या 378 से बेदखली एवं गाटा संख्या 376 पर 1977 में सिविल न्यायालय के आदेश का पालन करने का स्पष्ट आदेश अपर उप जिलाधिकारी नयायालय द्वारा जारी किया गया था।
गाटा संख्या 378 से बेदखली करने पहुंची राजस्व व पुलिस टीम की मौजूदगी में बुल्डोजर चला कर गाटा संख्या 376 को भी ध्वस्त कर दिया जबकि भवन में रहने वाली महिलाएं फरियाद करती नज़र आई हकांकि भवन ध्वस्त होने के बाद पहुंचे नायाब तहसीलदार अकबरपुर ने गाटा संख्या 376 पर बने भवन को गिराने पर नाराजगी प्राकट करते हुए दोनों जेसीबी को सीज़ कर दिया। उक्त मामले में पुलिस गठजोड़ व सुल्तानपुर जनपद के भू-माफियाओ की भूमिका भी बताई जा रही है। सिविल न्यायालय द्वारा 25 जनवरी 1977 को जारी आदेश एवं उक्त आदेश को बहाल रखने के लिए का अपर उपजिलाधिकारी अकबरपुर का निर्देश भी दबंग भू-माफियाओ के लिए बौना साबित हुआ और गठजोड़ के सहारे गाटा संख्या 376 को ध्वस्त कर दिया।
बहरहाल प्रशासनिक जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सभी की निगाहें अब डीएम द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे आगे की कार्रवाई तय होगी।





