विदेशों में तीन दशक से अधिक तक सेवा देने के बाद भी अपनी मिट्टी के लिए कुछ करने का जज़्बा डॉक्टर दंपत्ति में है जिंदा
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अम्बेडकरनगर/लखनऊ: तीन दशकों से अधिक समय तक ओमान में चिकित्सीय सेवाएं देने के बाद भारत लौटे डॉक्टर दंपति ने समाजसेवा की नई मिसाल पेश की है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा को मजबूत आधार देने के उद्देश्य से लखनऊ में गरीब छात्रों के लिए हॉस्टल की स्थापना की गई है, जहां पढ़ाई से लेकर भोजन और ट्यूशन तक की पूरी व्यवस्था निःशुल्क की गई है।
इस शिक्षा अभियान को औपचारिक रूप देने के लिए “द मॉर्निंग स्टार सोसायटी” का गठन किया गया है। सोसायटी के माध्यम से इंग्लिश मीडियम स्कूलों में जरूरतमंद बच्चों को फ्री शिक्षा दिलाने की पहल शुरू की गई है, ताकि आर्थिक तंगी किसी भी छात्र की प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बने।
शिक्षा को सामाजिक आंदोलन बनाने की कोशिश
समाजसेवा में सक्रिय डॉ. तैय्यबा–हयात किदवाई ने कहा कि शिक्षा केवल सुविधा नहीं, बल्कि अधिकार है। इसी सोच के साथ यह मिशन शुरू किया गया है। हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक भोजन और नियमित शैक्षणिक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्वांटिटी नहीं बल्कि क्वालिटी पर पर काम शुरू किया गया है।
अम्बेडकरनगर से लखनऊ तक सेवा का सफर
डॉक्टर दंपति मूल रूप से अम्बेडकरनगर के सूरापुर टाण्डा के निवासी हैं और तीन दशक से अधिक तक ओमान में चिकितसीय सेवा देकर भारत वापसी के बाद उन्होंने सबसे पहले शिक्षा के क्षेत्र को चुना, ताकि ग्रामीण और पिछड़े तबकों के उन बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके, जो आर्थिक रूप से काफी कमज़ोर हैं लेकिन उनके पास पढ़ाई कर कुछ बड़ा बनने का हौसला व सपना है।
शैक्षणिक संस्थानों से संवाद
बुधवार को डॉक्टर दंपति ने टाण्डा कौमी इंटर कॉलेज और ग्लोबल एम्बियन्स स्कूल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विदेश में चिकितसीय सेवा प्रदान करने के साथ टाण्डा में खैरुन्निशां हॉस्पिटल के माध्यम से गरीब परिवारों की मदद करने वाले डॉ. अतहर अंसारी से भेंट कर शिक्षा क्षेत्र में संयुक्त पहल करने की अपील की। साथ ही समाजसेवियों और शिक्षाविदों से आग्रह किया कि वे आगे आकर हर जनपद में मॉडल हॉस्टल की स्थापना में सहयोग करें।

हर जिले में मॉडल हॉस्टल का सपना
डॉक्टर दंपति का लक्ष्य है कि यह पहल केवल लखनऊ तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के हर जिले में ऐसे मॉडल हॉस्टल स्थापित हों, जहां गरीब लेकिन प्रतिभाशाली बच्चों को समान अवसर मिल सके। उन्होंने सभी समाजसेवियों को मॉडल हॉस्टल के तहत जरूरतमंद छात्रों को शिक्षा देने के लिए आमंत्रित किया।
वर्षों विदेश में रहकर वपस लौटे दंपत्ति का यह प्रयास न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में उम्मीद की किरण है, बल्कि यह भी साबित करता है कि विदेशों में सेवा देने के बाद भी अपनी मिट्टी के लिए कुछ करने का जज़्बा जिंदा रहता है। (खास रिपोर्ट आलम खान एडिटर सूचना न्यूज़ अम्बेडकरनगर)








