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पूर्व मंत्री व मखदूम अशरफ के वंशज सैय्यद अली अशरफी को किछौछा दरगाह में किया गया सुपुर्दे खाक

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अम्बेडकरनगर: अध्यात्मिक इलाज़ के लिए विश्व विख्यात सुल्तान शाह सैय्यद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी के वंशज सज्जादानशीन सरकार ए कलां स्व.मौलाना सैय्यद मो. मुख्तार अशरफ अशरफी उल जिलानी के तीसरे पुत्र सैय्यद अली अशरफी को किछौछा दरगाह में उनके पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्दे ख़ाक कर दिया गया। सैय्यद अली अशरफी 1980 में विधान परिषद के सदस्य मनोनीत हुए जबकि 1985 से 1989 तक पीलीभीत शहर के विधायक रहे।

जनता दल गठन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने के कारण नेता जी के चहेते थे और उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष भी बनाया गया तथा नेता जी द्वारा सैय्यद अली अशरफी को हरिजन व निर्बल वर्ग आवास निगम का चेयरमैन बना कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया। श्री अशरफ ने 1993 में अंतिम चुनाव पीलीभीत लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राजनीति में तेज़ी से गिरावट होने के करण श्री अली ने 53 वर्ष की उम्र में राजनीति से आजीवन सन्यास ले लिया और सरकारी आवास छोड़ कर अपने गोमती नगर आवास 2/121 विजय खंड में शिफ्ट हो गए। इस बीच श्री अली ने अल अशरफ फाउंडेशन की स्थापना कर अपने पिता हुजूर सरकारे कलां सैय्यद मो.मुख्तार अशरफ के सपनों को पूरा करते हुए इस्लाम धर्म के प्रचार व विस्तार एवं तब्लीग की तरफ कदम बढ़ाते हुए कई मदरसों व कॉलेज की स्थापना किया। मरहूम अली अशरफी द्वारा अधिकांश नासिक, मालेगांव, मुरादाबाद, बदायूं, रामनगर, उत्तर प्रदेश के मुबारकपुर आदि स्थानों पर काम किया। सैय्यद अली अशरफी के चाहने व मानने वालों की लंबी फेहरिस्त है। हज कमेटी ऑफ इंडिया के पूर्व सदस्य सैय्यद मकसूद अशरफ उर्फ अरशद मियां ने बताया कि दरगाह किछौछा में पैतृक कब्रिस्तान में सैय्यद अली अशरफी को सुपुर्दे ख़ाक किया गया।

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