अम्बेडकरनगर: जलालपुर कोतवाली क्षेत्र के अकबरपुर रोड स्थित मैनपुर मोड़ पर शुक्रवार को वह मंजर देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी। बीच सड़क पर एक विशालकाय अजगर बेखौफ रेंगता रहा और जिम्मेदार तंत्र गहरी नींद में सोता रहा। कभी भी जानलेवा हादसा हो सकता था, लेकिन न पुलिस दिखी, न वन विभाग- सड़क पर सिर्फ डर, भगदड़ और चीख-पुकार थी।
अजगर को देखते ही राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई। लोग बाइक-कार छोड़कर भागते नजर आए, यातायात ठप हो गया और भीड़ तमाशबीन बन गई। हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े खतरे के बावजूद सुरक्षा के नाम पर कुछ भी मौजूद नहीं था। सवाल यह है कि अगर अजगर किसी पर हमला कर देता, तो जवाबदेही किसकी होती?
इसी अफरातफरी के बीच विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष आदित्य मिश्रा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और प्रशासन की गैरमौजूदगी में खुद मोर्चा संभाला। बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उन्होंने साहस दिखाते हुए विशालकाय अजगर को सड़क से हटाकर किनारे सुरक्षित कराया। यदि यह पहल न होती, तो मैनपुर मोड़ पर किसी की जान जाना तय थी।
घटना की सूचना बाद में वन विभाग के क्षेत्राधिकारी स्नेह कुमार को दी गई, जिसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। काफी देर की देरी के बाद टीम ने अजगर को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा। रेस्क्यू भले हो गया हो, लेकिन सिस्टम की सुस्ती लोगों के गले नहीं उतर रही।
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि अजगर को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया है, मगर घटना ने एक कड़वा सच उजागर कर दिया है—
जब संकट आता है, तो सिस्टम नहीं, जनता ही खुद की रक्षक बनती है।
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि किसी के साथ अनहोनी हो जाती, तो प्रशासन केवल औपचारिक बयान देकर पल्ला झाड़ लेता। मैनपुर मोड़ की यह घटना चेतावनी है कि लापरवाही अब सीधे जानलेवा बनती जा रही है।




