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तहसील समाधान दिवस बना औपचारिकता? 355 शिकायतें, मौके पर निस्तारण सिर्फ 33 — अफसरों की कार्यशैली पर उठे सवाल, डीएम ने जताई नाराज़गी

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अम्बेडकरनगर: शासन के निर्देश पर जिले की सभी तहसीलों में आयोजित तहसील समाधान दिवस में जनसमस्याओं की बाढ़ आ गई, लेकिन मौके पर निस्तारण का आंकड़ा बेहद कम रहने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। अधिकारियों ने शिकायतें तो सुनीं, मगर अधिकांश मामलों में केवल निर्देश देकर जिम्मेदारी टाल दी गई। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण ससमय निस्तारण करने का सख्त निर्देश दिया।


तहसील भीटी में मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में 62 शिकायतें आईं, जिनमें से सिर्फ 06 का मौके पर निस्तारण हो सका।
अकबरपुर तहसील में 97 शिकायतों में से 07,
टांडा में 32 में से 06,
आलापुर में 65 में से 08,
और जलालपुर में सबसे अधिक 99 शिकायतों में से केवल 06 का समाधान किया गया।
जनपद पांचों तहसीलों में कुल 355 शिकायतों में से मात्र 33 का ही मौके पर निस्तारण हुआ, जबकि बाकी मामलों को संबंधित विभागों के हवाले कर दिया गया।
जनता का कहना है कि समाधान दिवस में समस्याएं सुन ली जाती हैं, लेकिन त्वरित समाधान के दावे धरातल पर कम ही दिखते हैं। वहीं अधिकारियों ने शेष प्रार्थना पत्रों को “त्वरित व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण” के निर्देश दिए हैं।
अब सवाल यह है कि जब मौके पर समाधान नहीं होगा, तो क्या तहसील समाधान दिवस सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा? हालांकि जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने सभी शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण ससमय निस्तारण करने का निर्देश दिया है।

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